काली पूजा यानी दिवाली पर पर्यावरण प्रदूषण को रोकने और पटाखों के शोर को नियंत्रित करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने कई कदम उठाए हैं। ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए गुरुवार को राज्य की गृह सचिव संघमित्रा घोष ने कड़ा संदेश दिया। उन्होंने बताया कि दिवाली पर जश्न तो हर कोई मनाएगा लेकिन ऐसा नियमों का पालन करते हुए करना होगा। उन्होंने कहा कि पटाखे जलाने पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन इन्हें एक निश्चित डेसिबल सीमा के भीतर ही जलाना होगा। ‘साइलेंस जोन’ में पटाखे न जलाने के निर्देश का पालन करना अनिवार्य है। संघमित्रा घोष ने कहा कि साइलेंस जोन में स्कूल, अस्पताल और वृद्धाश्रम शामिल हैं। अस्पताल के 100 मीटर के दायरे में पटाखे नहीं जलाए जा सकेंगे।
नवान्न में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते समय उनके साथ राज्य के डीजी सिद्धीनाथ गुप्ता और कोलकाता के पुलिस कमिश्नर अजय नंद भी उपस्थित थे। उन्होंने बताया कि प्रशासन पटाखा निर्माण कारखानों, पटाखों के भंडारण और बिक्री स्थलों पर विशेष निगरानी रखेगा। साथ ही कहा कि इस बात पर भी कड़ी निगरानी रखी जाएगी ताकि कोई भी पटाखा व्यापारी प्रतिबंधित पटाखे न बेच सकें। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए दिवाली वाली रात को 8 बजे से 10 बजे तक और छठ पूजा के दिन सुबह 6 बजे से 8 बजे तक ही पटाखे जलाने की अनुमति होगी। ग्रीन क्रैकर्स के लिए आवाज वाले पटाखों की अधिकतम सीमा 125 डेसिबल और प्रकाश उत्पन्न करने वाले पटाखों के लिए 90 डेसिबल तय की गई है।