ओडिशा हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्रापड़ा जिले के महाकालपड़ा ब्लॉक के टिकिरी की सरपंच चमेली ओझा के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को रद्द कर दिया। अदालत के इस फैसले के बाद चमेली ओझा सरपंच पद पर बनी रह सकेंगी।
चमेली ने जून में आरोप लगाया था कि पंचायत के विकास कार्यों को लेकर हुए विवाद के बाद ब्लॉक विकास अधिकारी (बीडीओ) और पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की और दुर्व्यवहार किया। वहीं, उनके खिलाफ दर्ज एक जवाबी शिकायत के आधार पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था। शिकायत में आरोप लगया गया था कि उन्होंने बीडीओ के साथ दुर्व्यवहार किया और सरकारी कामकाज में बाधा डाली। बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी।
चमेली ने अपने खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस प्रस्ताव का 22 में से 21 वार्ड सदस्यों ने समर्थन किया था। इसकी प्रक्रिया 27 जुलाई को शुरू हुई थी और मतदान के लिए 13 सितंबर की तारीख निर्धारित की गई थी।
11 अगस्त को सुनवाई पूरी करने के बाद अदालत ने पाया कि अविश्वास प्रस्ताव और इसके लिए बुलाई गई बैठक ओडिशा ग्राम पंचायत अधिनियम एवं नियमों का उल्लंघन करते थे।
चमेली के वकील सुकांत कुमार दलेई ने दलील दी कि सरपंच को अनिवार्य दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए थे।
उन्होंने कहा कि सरपंच को नोटिस, प्रस्ताव और मांग-पत्र (रिक्विजिशन) देना अनिवार्य है। इस मामले में चमेली को ये दस्तावेज नहीं दिए गए। उनकी अनुपस्थिति में कागजात उनके अशिक्षित पिता को सौंप दिए गए, जिन्होंने उन पर अंगूठे का निशान लगा दिया।
वकील ने आगे कहा कि चमेली को केवल नोटिस दिया गया था, जबकि प्रस्ताव और मांग-पत्र की प्रतियां नहीं सौंपी गईं। उन्होंने इस संबंध में उप-जिलाधिकारी (सब-कलेक्टर) के समक्ष दो आवेदन भी दिए थे, लेकिन उन्हें दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध नहीं कराई गईं।
इसके अलावा, उन्होंने दलील दी कि ओडिशा ग्राम पंचायत अधिनियम की धारा 24(2)(c) के तहत नोटिस जारी होने और मतदान के बीच अनिवार्य 15 दिनों का अंतर भी नहीं रखा गया था।
जस्टिस संजय कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली हाईकोर्ट की खंडपीठ ने चमेली ओझा के पक्ष में फैसला सुनाते हुए अविश्वास प्रस्ताव को रद्द कर दिया।