मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने रविवार को भुवनेश्वर स्थित लोक सेवा भवन कन्वेंशन सेंटर में राज्य स्तरीय विश्व जल दिवस 2026 समारोह का उद्घाटन किया और विभिन्न जल संसाधन परियोजनाओं की आधारशिला रखी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, मुख्यमंत्री ने कुल 2,612 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शुभारंभ किया। इनमें लगभग 2,292 करोड़ रुपये की लागत वाली 17 परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई, जबकि लगभग 320 करोड़ रुपये की 124 परियोजनाओं का औपचारिक उद्घाटन किया गया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में लोगों के लिए पानी की एक-एक बूंद अमूल्य है। उन्होंने सभी से जल संरक्षण का संकल्प लेने और विश्व जल दिवस के अवसर पर पानी की बर्बादी रोकने का संदेश हर घर तक पहुंचाने की अपील की।
प्रधानमंत्री की जल जीवन मिशन योजना को क्रांतिकारी बताते हुए मुख्यमंत्री ने पाइपलाइन के माध्यम से हर घर तक स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने और जल संकट समाप्त करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
उन्होंने कहा कि जल शक्ति अभियान के माध्यम से जल संरक्षण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया गया है। “कैच द रेन” पहल के तहत महिलाओं को जल गुणवत्ता परीक्षण और प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे समाज का कोई भी वर्ग पीछे न रहे और सभी को पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
मुख्यमंत्री ने जल प्रबंधन में लैंगिक असमानता खत्म करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने को सरकार का प्रमुख लक्ष्य बताया। उन्होंने कहा कि समृद्ध और विकसित ओडिशा के निर्माण के लिए जल सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है। महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को “जल साथी” के रूप में जोड़ा जा रहा है। इस वर्ष विश्व जल दिवस की थीम “वाटर एंड जेंडर” पर विशेष जोर दिया गया।
उन्होंने कहा कि जल संकट का सबसे अधिक असर गरीब वर्ग पर पड़ता है, इसलिए समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वच्छ पानी पहुंचाना सरकार की अंत्योदय नीति का हिस्सा है। मिशन शक्ति के तहत दूर-दराज और पिछड़े गांवों तक स्वच्छ जल पहुंचाने का कार्य जारी है। कृषि क्षेत्र में “मोरे क्रॉप पर ड्रॉप” नीति को बढ़ावा दिया जा रहा है। “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के जरिए ओडिशा वृक्षारोपण में अग्रणी राज्य बनकर उभरा है।
भविष्य में जल विवादों से बचने के लिए राज्य ने संतुलित जल नीति तैयार की है। सरकार का लक्ष्य सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के माध्यम से वर्ष 2036 तक फसल तीव्रता 220 प्रतिशत और 2047 तक 250 प्रतिशत तक बढ़ाना है। “छत योजना” और “अरुआ योजना” के तहत भूजल पुनर्भरण परियोजनाएं पहले ही पूरी की जा चुकी हैं।
मुख्यमंत्री ने नहर लाइनिंग प्रणाली, पुनर्वास कार्यक्रम, लोअर सुकतेल सिंचाई परियोजना और कुसुमी स्मार्ट सिंचाई परियोजना को सरकार के 21 महीनों की प्रमुख उपलब्धियां बताया। इन प्रयासों से लगभग 2.2 लाख हेक्टेयर भूमि के लिए अतिरिक्त सिंचाई की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने कहा कि जल का उचित उपयोग और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता बढ़ाना समय की आवश्यकता है। ओडिशा के विजन दस्तावेज 2036 और 2047 में बढ़ती आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जल सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। मुख्यमंत्री ने लोगों से जल प्रबंधन में महिला-पुरुष समान भागीदारी सुनिश्चित करने का संकल्प लेने की अपील की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राजीव भवन में ‘कालिका’ चाइल्डकेयर सेंटर का उद्घाटन किया और एआई आधारित नागरिक फीडबैक प्रणाली “बिंदु” चैटबॉट लॉन्च किया। जल संसाधन विभाग और केंद्रीय जल आयोग के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर भी किए गए। साथ ही “सुजला” कॉफी टेबल बुक और नदी एटलस का विमोचन किया गया।
वही, इस दौरान उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव ने सुझाव दिया कि जहां नए हाई-लेवल बैराज बनाए जा रहे हैं, वहां पुराने लो-लेवल पुलों को तोड़ने के बजाय उन पर गेट लगाकर जल संरक्षण किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव का अध्ययन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।
कार्यक्रम में मुख्य सचिव अनु गर्ग, जल संसाधन विभाग की प्रधान सचिव शुभ शर्मा, मुख्य अभियंता लिंगराज गौड़ा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।