ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति ने शनिवार को कहा कि ओडिया भाषा को ज्ञान, कौशल, नवाचार और अवसरों की भाषा बनाने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा को सशक्त बनाने का अर्थ केवल उसे बोलने तक सीमित नहीं है। जयदेव भवन में सामाजिक-सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्था विश्वमुक्ति की ओर से आयोजित राज्यस्तरीय संगोष्ठी “आम भाषा – आम गर्व ओ विकसित ओडिशा@2036 पाईं दृष्टिभंगी” को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने ओडिया में गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी, वैज्ञानिक और व्यावसायिक विषयों से जुड़ी अध्ययन सामग्री ओडिया में व्यापक रूप से उपलब्ध होनी चाहिए।
उन्होंने कानूनों, सरकारी योजनाओं और महत्वपूर्ण आधिकारिक दस्तावेजों का सरल एवं सहज ओडिया में अनुवाद करने की आवश्यकता भी बताई, ताकि ओडिया माध्यम से पढ़ने वाले विद्यार्थी उन्हें आसानी से समझ सकें और बेहतर तरीके से सीख सकें।
राज्यपाल ने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि यह किसी समाज की कल्पना, मूल्यों और सामूहिक आकांक्षाओं को भी दर्शाती है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ ज्ञान के आदान-प्रदान और सामाजिक-आर्थिक जीवन में भागीदारी को भी मजबूत करती है।
ओडिशा की समृद्ध भाषाई और साहित्यिक विरासत का उल्लेख करते हुए कंभमपति ने जयदेव, सारला दास और उपेंद्र भंज के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि भाषाई आधार पर ओडिशा का गठन एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी। प्रत्येक पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह राज्य की भाषा और विरासत की रक्षा करे, उसे समृद्ध बनाए और आगे की पीढ़ियों तक पहुंचाए।
राज्यपाल ने कहा कि आधुनिक तकनीक, डिजिटल प्लेटफॉर्म और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के माध्यम से ओडिया भाषा को युवा पीढ़ी के लिए अधिक प्रासंगिक और सुलभ बनाया जा सकता है। यह प्रयास विकसित ओडिशा@2036 के लक्ष्य की दिशा में भी महत्वपूर्ण होगा।
उन्होंने जोर देकर कहा कि ओडिया माध्यम के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, पेशेवर करियर और उभरती तकनीकों तक समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि ओडिया भाषा में मजबूत आधार के साथ अंग्रेजी और अन्य भाषाओं का ज्ञान युवाओं का दृष्टिकोण व्यापक करेगा और राज्य के विकास में योगदान देगा।
कंभमपति ने ग्रामीण और शहरी युवाओं, महिलाओं, श्रमिकों तथा समाज के विभिन्न वर्गों तक ज्ञान, कौशल, तकनीक और अवसरों की पहुंच सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने कानून, आबकारी एवं लोक निर्माण मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन द्वारा रचित कविता संग्रह “उठिबाकी जातिर कंकाल” का विमोचन किया और पुस्तक के प्रकाशन पर उन्हें बधाई दी।
उच्च शिक्षा, खेल एवं युवा सेवा तथा ओडिया भाषा, साहित्य एवं संस्कृति मंत्री सूर्यवंशी सूरज, भुवनेश्वर (एकाम्र) के विधायक बाबू सिंह, लेखिका एवं वक्ता प्रोफेसर अर्चना नायक तथा लेखक प्रोफेसर विश्वरंजन ने भी संगोष्ठी को संबोधित किया। विश्वमुक्ति के संपादक प्रोफेसर शशांक चूड़ामणि ने स्वागत भाषण दिया।