पश्चिम बंगाल में आजादी के बाद पहली बार बीजेपी कि सरकार बनते ही विरोधी नेताओं पर एक्शन का शुरू हो गया है। करीब 10 घंटे की पूछताछ के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने पूर्व मंत्री सुजीत बोस को गिरफ्तार कर लिया है। मंत्री को कोलकाता स्थित सीजीओ कॉम्प्लेकस में तलब किया गया था। अधिकारियों ने बताया कि बोस को जांच में सहयोग न करने और बयान में विसंगतियां पाए जाने के आधार पर गिरफ्तार कर लिया गया है। वह टीएमसी के पहले नेता हैं जो बंगाल विधानसभा चुनाव हारने के बाद गिरफ्तार किए गए हैं।
सुजीत बोस टीएमसी के दिग्गज नेताओं में शामिल हैं। वह विधान नगर क्षेत्र से तीन बार के विधायक रह चुके हैं लेकिन इस बार वह चुनाव हार गए साथ ही वह ममता बनर्जी सरकार में अग्निशमन एवं आपात कालीन सेवा मंत्री के पद पर भी कार्य कर चुके हैं। सुजीत बोस को कोलकाता और आसपास के इलाकों में टीएमसी का प्रभावशाली चेहरा माना जाता है। वह कोलकाता की सबसे लोकप्रिय दुर्गा पूजा श्रीभूमि स्पोटिंग कल्ब समितियों में एक के रुप में भी जाने जाते हैं।
बोस को चुनाव प्रचार के बीच में ही ईडी का समन मिला था, जो 2014 से कई नगर निकायों में कथित अवैध नियुक्तियों से जुड़ा है। वह एक मई को एजेंसी के सामने पेश हुए। इससे पहले उन्हें कथित रिश्वतखोरी घोटाले में ईडी द्वारा चार बार तलब किया जा चुका था, जिसमें पहला समन 2 अप्रैल को आया था। 10 अक्टूबर, 2025 को, ईडी की कई टीमों ने साल्ट लेक इलाके में बोस के कार्यालय, उनके बेटे के स्वामित्व वाले एक रेस्तरां, दक्षिण दमदम नगर पालिका के उपाध्यक्ष और बोस के करीबी सहयोगी निताई दत्ता के आवास और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट और एक ऑडिटर के घरों की तलाशी ली थी।