प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) संगठन को बड़ा झटका देते हुए केकेबीएन डिवीजन के चार भूमिगत माओवादी कैडरों ने कंधमाल पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया है। आत्मसमर्पण करने वाले सभी कैडर पार्टी सदस्य (पीएम) रैंक के हैं। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी कैडरों की पहचान गंगा कुंजामी उर्फ जीतन, मुचाकी मसे उर्फ सुमित्रा, चोमाली कुंजाम उर्फ संतिला और बंदी मड़वी उर्फ मालती के रूप में हुई है। इन सभी ने आत्मसमर्पण के दौरान हथियार, गोला-बारूद और अन्य आपत्तिजनक सामग्री पुलिस के समक्ष सौंप दी।
आत्मसमर्पण करने वाले सभी कैडर छत्तीसगढ़ के निवासी हैं। उन्होंने औपचारिक रूप से हिंसा का त्याग किया, उग्रवादी गतिविधियों से नाता तोड़ा और लोकतांत्रिक व्यवस्था में आस्था व्यक्त की। आत्मसमर्पण के समय उनके पास से विस्फोटक सामग्री, हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया, जिसमें एक एसएलआर राइफल और एक बोर गन शामिल है।
पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण के प्रमुख कारणों में ओडिशा पुलिस की लगातार अपील, सुरक्षा बलों का बढ़ता दबाव, माओवादी विचारधारा से मोहभंग, नेतृत्व का अभाव, स्थानीय समर्थन की कमी और ओडिशा सरकार की नई आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास नीति शामिल हैं।
आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों को इस नीति के तहत निम्नलिखित लाभ प्रदान किए जाएंगे—
Ø 10 लाख रुपये की इनामी राशि
Ø प्रत्येक को 25,000 रुपये की अंतरिम सहायता
Ø अंत्योदय गृह योजना के तहत आवास
Ø विवाह के लिए 25,000 रुपये की एकमुश्त सहायता
Ø निःशुल्क कौशल विकास प्रशिक्षण
Ø 36 महीनों तक 10,000 रुपये प्रति माह की सहायता राशि
Ø पीएमजीकेएवाई के तहत स्वास्थ्य कार्ड और मुफ्त राशन
ओडिशा पुलिस विभाग ने आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों को पूर्ण सुरक्षा, संरक्षण और हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया है, ताकि वे सम्मान और सुरक्षित जीवन के साथ अपना भविष्य फिर से संवार सकें। इस अवसर पर ओडिशा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने सीपीआई (माओवादी) संगठन के अन्य कैडरों और नेताओं से भी हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की।