ओडिशा के आवास एवं शहरी विकास विभाग ने गृह, वित्त, कृषि, पंचायती राज, स्वास्थ्य, एससी/एसटी तथा सहकारिता समेत विभिन्न विभागों से संपर्क कर शहरी क्षेत्रों में स्थित खाली और अनुपयोगी सरकारी इमारतों व आवासों की पहचान करने को कहा है। इन परिसंपत्तियों को पीएमएवाई-यू 2.0 योजना के तहत किराये से आय अर्जित करने वाले आवासीय इकाइयों में बदला जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य शहरी गरीबों, प्रवासी कामगारों, औद्योगिक श्रमिकों और कामकाजी महिलाओं को किफायती किराये पर आवास उपलब्ध कराना है। योजना के तहत दो मॉडल प्रस्तावित हैं—
मॉडल-1: सरकारी फंड से बनी खाली इमारतों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) या सार्वजनिक एजेंसियों के माध्यम से किफायती किराये के आवास में परिवर्तित करना।
मॉडल-2: निजी या सार्वजनिक संस्थाओं द्वारा नई किराये की आवासीय इकाइयों का निर्माण करना।
स्थानीय सर्वे के आधार पर स्थानीय निकायों द्वारा प्रारंभिक किफायती किराया तय किया जाएगा। किराये में हर दो वर्ष में 8 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी, जो पांच वर्षों में अधिकतम 20 प्रतिशत तक सीमित रहेगी। परियोजना का वित्तपोषण आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) की पीएमएवाई-यू 2.0 योजना के माध्यम से किया जाएगा।
विभागों से अनुरोध किया गया है कि वे ओडिशा के शहरी क्षेत्रों में स्थित अनुपयोगी सरकारी इमारतों और आवासों की पहचान कर इसकी जानकारी ओडिशा अर्बन हाउसिंग एंड डेवलपमेंट मिशन (OUHM) को दें, जो पीएमएवाई-यू 2.0 के क्रियान्वयन के लिए राज्य की नोडल एजेंसी है।