शिक्षा ‘ओ’ अनुसंधान (सोआ) डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी के लगभग 1500 पूर्व छात्रों के लिए एक भव्य ‘होम कमिंग’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। पूर्व छात्र अपने पुराने सहपाठियों से दोबारा मिले, शिक्षकों के साथ अपने रिश्तों को फिर से जीया और अपने अल्मा मेटर का भ्रमण करते हुए पुरानी यादों में खो गए।
पूर्व छात्रों ने सुबह अपने-अपने संस्थानों का दौरा किया, जबकि दोपहर में विश्वविद्यालय के सभागार में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज के निदेशक डॉ. देवाशीष दास और सीएसआईआर–इंस्टीट्यूट ऑफ मिनरल्स एंड मटीरियल्स टेक्नोलॉजी के निदेशक डॉ. रामानुज नारायण मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता एसओए के कुलपति प्रो. प्रदीप्त कुमार नंद ने की।
डॉ. दास ने पूर्व छात्रों से अगली पीढ़ी के विद्यार्थियों के साथ अपने ज्ञान और अनुभव साझा करने का आग्रह किया, जबकि डॉ. नारायण ने उनसे इस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में अध्ययन करने पर गर्व महसूस करने को कहा।
डॉ. दास ने पूर्व छात्रों को आपस में संपर्क बनाए रखने की सलाह भी दी। वहीं, डॉ. नारायण ने कहा कि उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके ज्ञान और शिक्षा का लाभ समाज को मिले।
प्रो. नंद ने हाल के वर्षों में विश्वविद्यालय द्वारा की गई प्रगति का उल्लेख किया और पूर्व छात्रों से अपने-अपने संस्थानों का दौरा कर यह देखने का आग्रह किया कि समय के साथ उनमें किस तरह का विकास हुआ है।
डेलॉइट, भुवनेश्वर के निदेशक डॉ. बिस्वा सामल और ओडिशा सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में संयुक्त निदेशक डॉ. डी.एस. अरविंद—दोनों ही सोआ के पूर्व छात्र—ने भी अपने अनुभव और यादें साझा कीं।
विश्वविद्यालय के चिकित्सा संकाय से 2018 में स्नातक डॉ. अरविंद ने कहा कि जीवन में उन्होंने जो कुछ भी हासिल किया है, वह विश्वविद्यालय की बदौलत है। डॉ. सामल ने कहा कि सोआ के पूर्व छात्रों की यह सामाजिक जिम्मेदारी है कि वे वर्तमान विद्यार्थियों की मदद करें।
इस अवसर पर सोआ के प्रो-वाइस चांसलर (एलुमनी रिलेशन) प्रो. प्रशांत कुमार पात्र, डीन (छात्र कल्याण) प्रो. ज्योति रंजन दास, एसोसिएट डीन, एलुमनी सेल–सोआ डॉ. सुष्मिता पंडा, निदेशक (कॉरपोरेट रिलेशन) रिप्ति रंजन दास तथा एलुमनी सेल–सोआ के सह-समन्वयक एवं सदस्य सचिव अभिषेक पटनायक ने भी संबोधन किया। कार्यक्रम का समन्वय इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज की प्रो. गाथा मोहंती ने किया।