ओडिशा की उपमुख्यमंत्री प्रभाति परिड़ा ने आज महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत कई योजनाओं, अभियानों और परियोजनाओं का औपचारिक शुभारंभ किया। यह कार्यक्रम विभाग के सम्मेलन कक्ष में आयोजित किया गया, जिसमें कानून, लोक निर्माण एवं आबकारी मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन भी उपस्थित थे।
उपमुख्यमंत्री ने कानून, लोक निर्माण एवं आबकारी मंत्री के साथ मिलकर आज 10 जिलों की 10 पंचायतों में ‘नारी अदालत’ पायलट परियोजना का शुभारंभ किया। उपमुख्यमंत्री ने इस पहल को ‘विकसित ओडिशा’ की दिशा में एक मजबूत आधार बताया। उन्होंने कहा कि इस कल्याणकारी मॉडल की सफलता स्थानीय स्तर पर इसके प्रभावी और सुचारु क्रियान्वयन पर निर्भर करती है, जिससे भेदभावमुक्त समाज का निर्माण हो सके।
कानून मंत्री ने कहा कि मध्यस्थता अधिनियम (Mediation Act) का उपयोग करते हुए नारी अदालत के माध्यम से दीवानी, पारिवारिक और दहेज से जुड़े मामलों का सौहार्दपूर्ण समाधान किया जाएगा, जिससे लंबित मुकदमों में उल्लेखनीय कमी आएगी। एक विशेष जूरी प्रणाली के तहत महिलाओं को न्याय सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जिससे पारदर्शिता और सुलभ न्याय को बढ़ावा मिलेगा। तालुका विधिक सेवा प्राधिकरणों के सहयोग से यह पहल गांव स्तर पर महिलाओं के लिए त्वरित और प्रभावी न्याय व्यवस्था प्रदान करेगी।
नारी अदालत पहल का उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और संवाद व मध्यस्थता के माध्यम से जमीनी स्तर पर त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण विवाद समाधान सुनिश्चित करना है। इस मंच के जरिए घरेलू हिंसा, दहेज, बाल संरक्षण और संपत्ति अधिकारों से जुड़े मामलों का समाधान पंचायत स्तर पर किया जाएगा, जिससे समयबद्ध और सुलभ न्याय मिल सके।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ने ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय बालिका दिवस–2026 के उपलक्ष्य में 17 जनवरी से 24 जनवरी तक आयोजित होने वाले राज्यव्यापी सप्ताहभर के समारोहों का भी शुभारंभ किया। इस दौरान सभी 30 जिलों में जागरूकता रैलियां, महाविद्यालयों में प्रतियोगिताएं, मेधावी छात्राओं का सम्मान और संबंधित विभागों के साथ समन्वय बैठकें आयोजित की जाएंगी। इस अभियान का उद्देश्य लिंग-आधारित भ्रूण हत्या पर रोक लगाना, लैंगिक समानता को बढ़ावा देना और बालिका के प्रति सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव लाना है।