ओडिशा विधानसभा का बजट सत्र आज शुरू हुआ, जिसमें राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभंपति ने ‘जय जगन्नाथ’ कहकर अपना अभिभाषण दिया।
अपने भाषण में उन्होंने राज्य की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ओडिशा विकसित भारत का विकास इंजन बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि 2036 तक ओडिशा अपने गठन के 100 वर्ष पूरे करेगा। उस ऐतिहासिक वर्ष तक समृद्ध ओडिशा सुनिश्चित करने के लिए मेरी सरकार ने कई पहल की हैं। मेरी सरकार एक समृद्ध और सशक्त ओडिशा के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि इससे राज्य को कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं मिली हैं। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत में ओडिशा सेमीकंडक्टर हब बनेगा। राज्य सरकार सड़कों का आधुनिकीकरण कर रही है और बुनियादी ढाँचे को मजबूत बना रही है।
राज्यपाल ने सदन को बताया कि संपर्क बढ़ाने और आर्थिक विकास को गति देने के लिए राज्य में सड़कों के व्यापक आधुनिकीकरण का अभियान चल रहा है। इसके अलावा उन्होंने जयदेव भुवनेश्वर–नंदनकानन रोड पर फ्लाईओवर तथा रामेश्वर–पारादीप तटीय राजमार्ग की मंजूरी की घोषणा की। उन्होंने राज्य में कुपोषण और एनीमिया समाप्त करने के सरकार के लक्ष्य पर भी जोर दिया।
उन्होंने दीर्घकालिक विकास के लिए मजबूत आधारभूत संरचना निर्माण पर सरकार के फोकस का उल्लेख किया। एक प्रमुख परियोजना भुवनेश्वर–खोर्धा–कटक रिंग रोड है, जिसका उद्देश्य संपर्क बेहतर करना, शहरी भीड़भाड़ कम करना और क्षेत्र में व्यापार व निवेश को बढ़ावा देना है।
राज्यपाल ने इस्पात क्षेत्र में ओडिशा की अग्रणी स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में 55 स्टील संयंत्र हैं, जिनकी वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 45 मिलियन टन है और यह देश के कुल इस्पात उत्पादन का करीब 23 प्रतिशत योगदान देते हैं। उन्होंने बताया कि ओडिशा 2030 तक अपनी इस्पात उत्पादन क्षमता 100 मिलियन टन तक बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।
उन्होंने बताया कि लघु खनिज क्षेत्र में सुधारों से पारदर्शिता और राजस्व में वृद्धि हुई है—2022-23 में 1,195 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 1,776 करोड़ रुपये हो गया, जो वार्षिक 19 प्रतिशत वृद्धि और दो वर्षों में 48 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है।
राज्यपाल ने ‘मेक इन ओडिशा’ की सफलता का भी उल्लेख किया, जिसके तहत दो लाख करोड़ रुपये के 85 औद्योगिक प्रोजेक्ट प्रगति पर हैं, जिनसे 1.65 लाख नौकरियाँ पैदा होंगी। कुल मिलाकर विभिन्न पहलों से 4.65 लाख लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रयासों की भी सराहना की और बताया कि स्वयं सहायता समूहों व ग्रामीण आजीविका कार्यक्रमों के माध्यम से 16.42 लाख ‘लखपति दीदी’—ऐसी महिला उद्यमी जो सालाना 1 लाख रुपये से अधिक कमाती हैं—तैयार की गई हैं।