विभिन्न लंबित मांगों को लेकर बुधवार को स्वास्थ्य भवन अभियान का आह्वान करने वाली पश्चिम बंगाल की आशा कर्मियों को राज्य के कई हिस्सों में कोलकाता पहुंचने से रोके जाने का आरोप सामने आया है। उत्तर और दक्षिण बंगाल के अलग-अलग जिलों से राजधानी की ओर रवाना हो रहीं आशा कर्मियों ने परिवहन और पुलिस स्तर पर बाधाएं खड़ी किए जाने का दावा किया है। इसके विरोध में कई जगहों पर सड़क अवरोध किये गए जिससे तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई।
आशा कर्मी संगठनों के अनुसार, वे स्वास्थ्य भवन जाकर राज्य के स्वास्थ्य सचिव को ज्ञापन सौंपने की योजना में थीं। इसी उद्देश्य से सुबह से ही विभिन्न जिलों से कोलकाता आने की तैयारियां की गई थीं। हालांकि, बांकुड़ा, पश्चिम मेदिनीपुर, दुर्गापुर और उत्तर बंगाल के कुछ इलाकों में आशा कर्मियों का आरोप है कि बस मालिकों पर दबाव डालकर उन्हें परिवहन सुविधा देने से रोका गया। कई स्थानों पर पुलिस हस्तक्षेप के भी आरोप लगाए गए हैं।
बांकुड़ा जिले के खातड़ा क्षेत्र में आशा कर्मियों ने बस न मिलने के विरोध में पंप मोड़ पर सड़क जाम कर दिया, जिससे खातड़ा–बांकुड़ा और खातड़ा–सिमलापाल मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। इसी तरह, बड़जोड़ा ब्लॉक के बेलियातोड़ इलाके में बांकुड़ा–दुर्गापुर राज्य राजमार्ग को अवरुद्ध किया गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से बातचीत के जरिए स्थिति को संभालने का प्रयास किया, लेकिन जाम के कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
वहीं, विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर दमानात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। दूसरी र, आंदोलनकारी आशा कर्मियों का कहना है कि उनकी मांगें पूरी तरह जायज हैं और मासिक मानदेय बढ़ाने सहित कई मुद्दों पर लंबे समय से अनसुनी हो रही है। उनका आऱोप है कि शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।