ओडिशा सरकार ने बुधवार को घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 और दहेज निषेध अधिनियम, 1961 पर राज्य स्तरीय अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान उपमुख्यमंत्री प्रभाति परिडा ने ‘दहेज मुक्त ओडिशा’ और ‘घरेलू हिंसा मुक्त घर’ बनाने के लिए सभी संबंधित पक्षों से समन्वित प्रयास करने का आह्वान किया।
महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से भुवनेश्वर स्थित स्टेट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम में दोनों कानूनों के प्रावधानों, संबंधित हितधारकों की भूमिका एवं जिम्मेदारियों तथा घरेलू हिंसा और दहेज से जुड़े अपराधों के मामलों में समन्वित कार्रवाई की व्यवस्था पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग की आयुक्त-सह-सचिव मृणालिनी दरस्वाल, निदेशक मोनिशा बनर्जी और अतिरिक्त सचिव सुमित्रा पटनायक सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
ओडिशा के विभिन्न हिस्सों से उपजिलाधिकारी (सब-कलेक्टर), संरक्षण अधिकारी, पुलिसकर्मी, वन स्टॉप सेंटर (OSC) और शक्ति सदन के अधिकारी-कर्मचारी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के प्रतिनिधि तथा महिला सशक्तीकरण के लिए जिला हब (DHEW) के अधिकारी कार्यक्रम में शामिल हुए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री प्रभाति परिडा ने महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तीकरण सुनिश्चित करने के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने कानूनी अधिकारों की जानकारी होना बेहद जरूरी है, ताकि वे सशक्त बन सकें और हिंसा, भेदभाव तथा दहेज जैसी प्रथाओं के खिलाफ अपनी आवाज उठा सकें।
उन्होंने कहा कि सरकार के ‘दहेज मुक्त ओडिशा’ और ‘घरेलू हिंसा मुक्त घर’ के लक्ष्य को प्रभावी कानून लागू करने, जमीनी स्तर पर जागरूकता बढ़ाने और सभी संबंधित विभागों एवं हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय से ही हासिल किया जा सकता है।
उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों से अपील की कि घरेलू हिंसा या दहेज उत्पीड़न का सामना करने वाली महिलाओं को समय पर सुरक्षा, कानूनी सहायता, परामर्श और अन्य आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।
उन्होंने एक संवेदनशील और समन्वित सहायता व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया, ताकि संकट में फंसी महिलाएं निर्धारित समय के भीतर सहायता प्राप्त कर सकें और उन्हें कानून के तहत मिलने वाली सुरक्षा एवं न्याय सुनिश्चित हो सके।