राज्य सरकार ने जेपीएससी-जेएसएससी द्वारा आयोजित 22 परीक्षाओं को रद्द कर दिया है। सरकार के इस निर्णय के खिलाफ इससे प्रभावित कर्मचारी झारखंड मंत्रालय के सामने लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि सरकार ने तुगलकी फरमान के जरिए 11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के साथ-साथ सीजीएल में सफल अभ्यर्थियों को सड़क पर ला दिया है। कर्मचारी न्याय दो या फांसी दो के नारों के साथ सरकार से अधिसूचना वापस लेने की मांग कर रहे हैं। आंदोलन कर रहे कर्मियों ने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती, तब तक वे यहीं बैठे रहेंगे।भारी बारिश के बीच न्याय दो या फांसी दो का नारा लगाते हुए सरकार से गुहार लगा रहे इन कर्मियों का कहना है कि हमारी नियुक्ति हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश पर हुआ है, इसके बावजूद सरकार ने इसे नहीं माना और एक झटके में सीजीएल की बहाली को रद्द कर दिया।
कर्मियों ने कहा कि इसके खिलाफ हम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। साथ ही सरकार को भी चैन से नहीं रहने देंगे।आंदोलनकारी के द्वारा एक तरफ जहां बिरसा मुंडा अमर रहे के नारे लगाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री हाय-हाय के नारों से झारखंड मंत्रालय का गेट गूंज रहा है। इस आंदोलन में सीजीएल के साथ-साथ 11वीं से 13वीं जेपीएससी के जरिए सफल हुए पदाधिकारी भी शामिल हैं।
आंदोलन कर रहे लोगों ने ईटीवी भारत से कहा कि वे अपनी नौकरी वापस लेकर रहेंगे। आंदोलनकारी संजीत कहते हैं कि सरकार ने हमारे साथ ज्यादती की है। इसी प्रोजेक्ट भवन में हम कल तक काम करते थे, लेकिन सरकार ने एक झटके में हमलोगों को सड़क पर ला दिया। बहरहाल, कर्मचारी सरकार से खासा नाराज हैं और आंदोलन उग्र करने की चेतावनी दी है।