भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के नौ दिवसीय गुंडिचा यात्रा पर रहने के दौरान श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) ने 12वीं शताब्दी के श्रीमंदिर में संरक्षण, मरम्मत और आभूषणों की सूचीकरण (इन्वेंट्री) का कार्य शुरू कर दिया है। श्रीमंदिर के मुख्य प्रशासक डॉ. अरविंद कुमार पाढ़ी की अध्यक्षता में मंदिर कार्यालय में हुई महत्वपूर्ण बैठक के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और मंदिर प्रशासन की तकनीकी टीम ने मंदिर का निरीक्षण किया।
इस अवधि में, जब भगवान श्रीमंदिर में विराजमान नहीं हैं, तब गर्भगृह, नाट मंडप और भोग मंडप में संरक्षण एवं मरम्मत का कार्य किया जाएगा। इन संरचनाओं के संरक्षण का कार्य सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (CBRI) और आईआईटी मद्रास की टीम कर रही है। आधुनिकीकरण के तहत नाट मंडप को वातानुकूलित (एयर-कंडीशंड) भी बनाया जाएगा, जिसका कार्य शुरू हो चुका है।
मंदिर प्रशासन शनिवार से भगवान के आभूषणों की गिनती और मूल्यांकन का कार्य भी शुरू करेगा। डॉ. पाढ़ी ने बताया कि राहु रेखा, झोबा, सोना चिता और रूपा रसिक सुआ ठंटिया सहित भगवान के आभूषणों का 3डी स्कैनिंग के साथ सूचीकरण किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि भगवान के गुंडिचा मंदिर में विराजमान रहने के दौरान ही इन आभूषणों की सूची तैयार करने का यह सबसे उपयुक्त अवसर है।
इधर, आज गुंडिचा मंदिर में भगवान जगन्नाथ की आड़प बिजे नीति संपन्न होगी। इसके लिए मंदिर प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
शाम को होने वाली आड़प पहंडी को लेकर शुक्रवार रात से ही लाखों श्रद्धालु गुंडिचा मंदिर पहुंच चुके हैं। मुख्य प्रशासक ने कहा कि प्रशासन के सभी नियमों का पालन करने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को भगवान के दर्शन और आशीर्वाद का लाभ मिलना चाहिए।