पुरी रथयात्रा 2026 में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए ओडिशा सीआईडी-क्राइम ब्रांच की साइबर क्राइम यूनिट ने श्रद्धालुओं को ऑनलाइन ठगी से बचाने के लिए विशेष अभियान चलाया। इस अभियान के तहत कई फर्जी वेबसाइटों और साइबर धोखाधड़ी के माध्यमों पर कार्रवाई की गई। 1 जून से 18 जुलाई 2026 के बीच साइबर क्राइम यूनिट ने सक्रिय निगरानी और निवारक कदम उठाए ताकि होटल, परिवहन और अन्य सेवाओं की ऑनलाइन बुकिंग करने वाले श्रद्धालु साइबर ठगी का शिकार न हों। पुलिस के अनुसार साइबर अपराधी फर्जी होटल वेबसाइटों, नकली बुकिंग पेजों और भ्रामक ऑनलाइन सामग्री के जरिए पर्यटकों को ठगने की कोशिश कर रहे थे।
अभियान के दौरान 121 फर्जी होटल वेबसाइटों और 33 फर्जी होटल वेबपेजों को हटाया या ब्लॉक कराया गया। इसके अलावा रथयात्रा से संबंधित 19 भ्रामक ऑनलाइन पोस्ट और सामग्री भी डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाई गई।
सेवा प्रदाताओं के सहयोग से 893 मोबाइल नंबर और 793 आईएमईआई (IMEI) नंबर भी ब्लॉक किए गए, जिनका इस्तेमाल फर्जी कस्टमर केयर, ई-कॉमर्स धोखाधड़ी, होटल बुकिंग फ्रॉड और श्रद्धालुओं को निशाना बनाने वाले अन्य साइबर अपराधों में किया जा रहा था। अधिकारियों ने कहा कि इस कार्रवाई से श्रद्धालुओं को आर्थिक नुकसान से बचाने और रथयात्रा को सुरक्षित एवं सुगम बनाने में मदद मिली।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि होटल, गेस्ट हाउस और यात्रा की बुकिंग केवल आधिकारिक वेबसाइटों या प्रमाणित मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से ही करें। साथ ही एसएमएस, व्हाट्सएप या सोशल मीडिया पर प्राप्त किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और ऑनलाइन भुगतान करने से पहले वेबसाइट तथा उसके संपर्क नंबर की सत्यता की जांच अवश्य करें।
श्रद्धालुओं को यह भी सलाह दी गई है कि वे किसी के साथ ओटीपी, यूपीआई पिन, बैंक खाते या डेबिट/क्रेडिट कार्ड की जानकारी साझा न करें। इसके अलावा सस्ते दर्शन टिकट, होटल कमरे या 'स्पेशल पास' के नाम पर दिए जाने वाले आकर्षक ऑफरों से भी सतर्क रहने को कहा गया है।
यदि कोई व्यक्ति साइबर धोखाधड़ी का शिकार होता है, तो वह तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर सकता है, www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करा सकता है या अपने निकटतम पुलिस थाने से संपर्क कर सकता है।