राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि उत्तर ओडिशा में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। भारी बारिश के कारण 10 जिलों के 80 ब्लॉकों की 1,071 पंचायतों और 325 ग्राम पंचायतों के क्षेत्र प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा, 10 शहरी क्षेत्रों के 49 वार्ड भी प्रभावित हुए हैं।
करीब 40,329 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि 721 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। 10 जिलों में 395 राहत केंद्र खोले गए हैं। बाढ़ से 73,085 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। मंत्री ने बताया कि झारखंड से आ रहे बाढ़ के पानी के कारण मयूरभंज, बालेश्वर, भद्रक, जाजपुर और केंद्रापड़ा के कुछ इलाकों में स्थिति चिंताजनक हो सकती है।
हालांकि, महानदी बेसिन में बाढ़ का कोई खतरा नहीं है। मंत्री ने कहा कि अगले 48 घंटे में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है।
इस बीच, बालेश्वर जिले के नीलगिरी क्षेत्र में सोना नदी में बाढ़ आने से 5 पंचायतों के नदी किनारे बसे गांवों के लोग दहशत में हैं। बड़िया गांव जाने वाली सड़क पर करीब 10 फीट पानी भर गया है, जिससे गांव का बाहरी दुनिया से संपर्क कट गया है। निम्न दबाव के कारण हो रही बारिश से हीराकुद जलाशय का जलस्तर भी बढ़ रहा है।
वर्तमान में हीराकुद जलाशय के 16 गेटों से बाढ़ का पानी छोड़ा जा रहा है, जिनमें 11 गेट बाईं ओर और 5 गेट दाईं ओर हैं। वहीं, बैतरणी नदी में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। क्योंझर के पाटना में नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। यहां खतरे का निशान 311.10 मीटर है, जबकि आज सुबह 5 बजे जलस्तर 311.27 मीटर दर्ज किया गया।
सहरपड़ा ब्लॉक में कपुंडी-पैड़ा नहर पर करीब 5 फीट ऊंचाई तक बाढ़ का पानी बह रहा है, जिससे पाटना मुख्यालय से 5 पंचायतों का संपर्क कट गया है।
ऊपरी इलाकों में भारी बारिश के कारण जाजपुर जिले के अखुआपाड़ा में भी बैतरणी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। यहां खतरे का निशान 18.33 मीटर है और नदी का जलस्तर इससे 1 मीटर से अधिक ऊपर पहुंच गया है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है और तटबंधों की निगरानी एवं गश्त की जा रही है।
मयूरभंज जिले में भी भारी बारिश के कारण सुलियापड़ा, मोरड़ा, चित्रडा और रासगोविंदपुर ब्लॉकों में जलका नदी छठी बार उफान पर है। बस्ता ब्लॉक की 7 पंचायतें प्रभावित हुई हैं और हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है।