ओडिशा के नवरंगपुर स्थित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने दुष्कर्म के एक मामले में डेविड गरडा को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इसके अलावा, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पीड़िता को सात लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया गया है।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बासुदेव आचार्य ने 18 गवाहों के बयान और साक्ष्यों की जांच के बाद यह फैसला सुनाया। अदालत ने आदेश दिया कि जुर्माना नहीं भरने पर दोषी को एक साल की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता ने 31 अक्टूबर 2025 को नवरंगपुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि गरडा ने उसके साथ दुष्कर्म किया और बाद में उसे धमकी भी दी।
आरोपी पीड़िता के पिता के अधीन साउंड सिस्टम ऑपरेटर के रूप में काम करता था। आरोप है कि उसने खुद को मनोवैज्ञानिक बताकर पीड़िता को मानसिक परेशानी से उबरने में मदद करने के बहाने उसकी काउंसलिंग शुरू की। इसके बाद उसका पीड़िता के घर आना-जाना बढ़ गया और दोनों के बीच बातचीत भी बढ़ने लगी।
शिकायत के मुताबिक, आरोपी ने शुरुआत में पीड़िता की इच्छा के विरुद्ध उसे गले लगाया और चूमा। मार्च 2024 में जब पीड़िता घर में अकेली थी, तब उसने कथित तौर पर उसके साथ दुष्कर्म किया और घटना के बारे में किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी।
बाद में जब पीड़िता का मासिक धर्म रुक गया, तो उसने आरोपी को इसकी जानकारी दी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि आरोपी ने उसे प्रेग्नेंसी टेस्ट किट दी। इसके बाद उसने पीड़िता को सोडा वाटर और पपीता खाने को दिया, जिसके बाद उसका मासिक धर्म फिर से शुरू हो गया।
पीड़िता उच्च शिक्षा के लिए भुवनेश्वर चली गई, लेकिन आरोप है कि आरोपी उस पर मिलने के लिए दबाव डालता रहा। सितंबर 2025 में उसने कथित तौर पर शादी करने से समस्या का समाधान होने का भरोसा दिलाया और कुछ कागजात पर पीड़िता के हस्ताक्षर भी करवाए।
अभियोजन पक्ष ने आगे आरोप लगाया कि पीड़िता के पिता द्वारा उसे आरोपी के पास नहीं भेजने पर उसने पीड़िता की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी। बाद में उसने इंस्टाग्राम पर पीड़िता के माता-पिता की तस्वीरें भी पोस्ट कीं।
जांच के बाद नवरंगपुर पुलिस ने गरडा को गिरफ्तार कर अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। मामले को अदालत में टीआर-06/25 के रूप में दर्ज किया गया था। मुकदमे के दौरान सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक मृत्युंजय महाराणा ने पैरवी की।