प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 132वें एपिसोड में संबलपुर की मछली पालक सुजाता भुइयां की सराहना करते हुए उन्हें समुदाय की महिलाओं के लिए नई उम्मीद की किरण बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सुजाता पहले एक गृहिणी थीं, लेकिन वह कुछ नया करना चाहती थीं और अपने परिवार की आर्थिक मदद करना चाहती थीं। इसी सोच के साथ उन्होंने कुछ वर्ष पहले हीराकुद जलाशय में मछली पालन शुरू किया।
उन्होंने कहा कि शुरुआती दिन उनके लिए आसान नहीं थे। मौसम में बदलाव, मछलियों के लिए भोजन की व्यवस्था और घरेलू जिम्मेदारियों के बीच संतुलन जैसी कई चुनौतियां थीं, लेकिन उनका हौसला कभी नहीं डगमगाया। केवल दो-तीन वर्षों में ही उन्होंने अपने प्रयास को एक सफल व्यवसाय में बदल दिया। आज उनकी सफलता समुदाय की महिलाओं के लिए नई प्रेरणा बन गई है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारे मछुआरा भाई-बहन केवल समुद्र के योद्धा ही नहीं हैं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव भी हैं। वे सुबह होने से पहले ही समुद्र की लहरों से संघर्ष करते हुए अपने परिवार और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए निकल पड़ते हैं। आज कई योजनाओं के माध्यम से उनके जीवन को आसान बनाया जा रहा है। चाहे बंदरगाहों का विकास हो या मछुआरों के लिए बीमा योजनाएं, ऐसे अनेक प्रयास बेहद सहायक साबित हो रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि मौसम के बदलते पैटर्न का मछुआरों के काम पर बड़ा प्रभाव पड़ता है, इसलिए तकनीक के माध्यम से उन्हें पूरा सहयोग दिया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे बेहद खुशी है कि ऐसे प्रयास न केवल मत्स्य क्षेत्र को समृद्ध कर रहे हैं, बल्कि नवाचार की भावना को भी बढ़ावा दे रहे हैं। आज मत्स्य पालन और समुद्री शैवाल (सीवीड) के क्षेत्र में नए-नए नवाचार हो रहे हैं और हमारे मछुआरे आत्मनिर्भर बन रहे हैं।