केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कहा कि भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) रोजाना करीब 80 करोड़ लेनदेन संसाधित करता है। वहीं, ओडिशा में उद्घाटित भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का ग्रीनफील्ड डेटा सेंटर और प्रशिक्षण संस्थान देश के डिजिटल बुनियादी ढांचे को और मजबूत करेगा।
खुर्दा जिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आरबीआई की इस सुविधा के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए सीतारमण ने कहा कि यूपीआई दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम भुगतान प्रणाली बनकर उभरा है। वित्त वर्ष 2016-17 के बाद से इसके वार्षिक लेनदेन की मात्रा में लगभग 13,000 गुना वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि अब यह डिजिटल भुगतान मंच एक महीने में 2,400 करोड़ से अधिक लेनदेन करता है, जो भारत के डिजिटल भुगतान बुनियादी ढांचे के व्यापक विस्तार और बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।
वित्त मंत्री ने कहा, “यूपीआई दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम भुगतान प्रणाली बन गया है। वित्त वर्ष 2016-17 के बाद से इसके वार्षिक लेनदेन की मात्रा लगभग 13,000 गुना बढ़ी है। अब यह एक महीने में 2,400 करोड़ से अधिक लेनदेन करता है, यानी रोजाना करीब 80 करोड़ लेनदेन।
उन्होंने कहा कि यूपीआई के तेजी से विस्तार से देश में एक मजबूत फिनटेक इकोसिस्टम विकसित हुआ है। इसके माध्यम से लाखों ऐसे लोगों को ऋण, बीमा और निवेश के अवसर मिले हैं, जो पहली बार इन वित्तीय सेवाओं से जुड़े हैं।
डिजिटल बुनियादी ढांचे के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालते हुए सीतारमण ने डेटा सेंटरों को “डिजिटल युग के सुरक्षित भंडार” बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में डेटा सेंटरों को बुनियादी ढांचे का दर्जा दिया गया था। वहीं, केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत में स्थित डेटा सेंटरों के माध्यम से वैश्विक क्लाउड सेवाएं प्रदान करने वाली विदेशी कंपनियों के लिए कर अवकाश की घोषणा की गई है।
सीतारमण ने कहा कि नवनिर्मित आरबीआई सुविधा में केंद्रीय बैंक की महत्वपूर्ण प्रणालियां संचालित होंगी। इनमें रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) और नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड्स ट्रांसफर (NEFT) जैसी प्रणालियां शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि इस परिसर में एक प्रशिक्षण संस्थान भी होगा, जिसमें साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डेटा सेंटरों के क्षेत्र में विशेषज्ञता विकसित करने के लिए एक समर्पित अनुसंधान इकाई स्थापित की जाएगी।
इस सुविधा से भारत की वित्तीय प्रणाली और डिजिटल भुगतान नेटवर्क को सहयोग देने वाले घरेलू बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद है।