5.14 करोड़ रुपये के ऑनलाइन निवेश ठगी मामले में पश्चिम बंगाल से दो गिरफ्तार

  • Apr 28, 2026
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भुवनेश्वर,28 अप्रैलः

राज्य अपराध शाखा की साइबर विंग ने फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए 5.14 करोड़ रुपये की ऑनलाइन निवेश ठगी मामले में पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान किरण गुरंग (55), निवासी तिउमल पाड़ा (सिलीगुड़ी थाना) और रणधीर कुमार राय (46), निवासी वार्ड नंबर 03, गुरंग बस्ती (प्रधान नगर थाना), दार्जिलिंग के रूप में हुई है।

 आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ओडिशा राज्य अपराध शाखा के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए ठगी के एक मामले में बड़ी सफलता हासिल की है, जिसमें ऊंचे रिटर्न का झांसा दिया जाता था।

 यह मामला 09.04.2025 को केस नंबर 12 के तहत भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66-सी और 66-डी के तहत दर्ज किया गया था।

 शिकायत के अनुसार, साइबर ठगों ने पीड़ित को शेयर बाजार में निवेश के नाम पर एक फर्जी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए झांसा दिया। पीड़ित ने 17 मार्च 2025 से शुरू होकर 20 दिनों में कुल 5,14,00,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए, क्योंकि उसे ऊंचे मुनाफे का भरोसा दिलाया गया था।

 शुरुआत में प्लेटफॉर्म पर फर्जी मुनाफा दिखाकर विश्वास जीता गया। लेकिन जब पीड़ित ने पैसे निकालने की कोशिश की, तो ठगों ने अनुरोध को ब्लॉक कर दिया और अतिरिक्त रकम की मांग की। ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क किया और कटक स्थित CID-CB साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।

 शिकायत के बाद इंस्पेक्टर राजकिशोर बेहरा के नेतृत्व में टीम ने मनी ट्रेल और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण करते हुए गहन जांच की। इसके बाद दार्जिलिंग में छापेमारी कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि इस रैकेट से जुड़े एक संयुक्त बैंक खाते में ठगी की कुल राशि में से 49.1 लाख रुपये आए थे।

 कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मोबाइल फोन, सिम कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए, जिनका इस्तेमाल इस ठगी में किया गया था।

 आरोपियों को सिलीगुड़ी के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (ACJM) की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर लिया गया। अब उन्हें आगे की जांच के लिए ओडिशा लाया जा रहा है और बाद में भुवनेश्वर के SDJM कोर्ट में पेश किया जाएगा।

 प्रारंभिक जांच से संकेत मिला है कि आरोपी एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का हिस्सा हैं, जो फर्जी निवेश योजनाओं के जरिए लोगों को ठगता था और अवैध धन को कई बैंक खातों के माध्यम से घुमाता था। गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान और बाकी रकम का पता लगाने के प्रयास जारी हैं।

 अपराध शाखा ने आम लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर मिलने वाले फर्जी निवेश ऑफर्स से सावधान रहें और बिना सत्यापन के किसी भी योजना में पैसा निवेश न करें। किसी भी साइबर ठगी की घटना की तुरंत सूचना 1930 हेल्पलाइन या [www.cybercrime.gov.in](http://www.cybercrime.gov.in) पर दें।

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