ओडिशा विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन मंगलवार को विपक्ष के लगातार विरोध-प्रदर्शन के कारण सदन की कार्यवाही बाधित रही। एमएमडीआर बिल और स्कूल की पाठ्यपुस्तकों में कथित गलतियों को लेकर बीजद (बीजेडी) और कांग्रेस के सदस्यों ने नारेबाजी की। इसके चलते विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित की।
विपक्षी सदस्य तख्तियां लेकर सदन के वेल में पहुंच गए और विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी करने लगे। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने पहले सदन की कार्यवाही दोपहर 1:10 बजे तक स्थगित कर दी। जब सदन दोबारा शुरू हुआ, तो विपक्षी सदस्यों ने फिर हंगामा शुरू कर दिया, जिसके कारण कार्यवाही शाम चार बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
सत्र की शुरुआत दिवंगत विधायकों, सार्वजनिक जीवन से जुड़ी हस्तियों और सरकारी कर्मचारियों के निधन पर शोक प्रस्ताव के साथ हुई। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शोक प्रस्ताव पेश किए और दिवंगत विशिष्ट लोगों के निधन पर दुख व्यक्त किया।
सदन ने नेपाल में आई बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों को भी श्रद्धांजलि दी। सदस्यों ने परंपरागत रूप से मौन रहकर श्रद्धांजलि अर्पित की, जिसके बाद सदन की निर्धारित कार्यवाही शुरू हुई।
हालांकि, जैसे ही प्रश्नकाल शुरू हुआ, बीजद और कांग्रेस के विधायक तख्तियां लेकर वेल में पहुंच गए। उन्होंने एमएमडीआर बिल और स्कूल की पाठ्यपुस्तकों में कथित गलतियों को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित हो गई।
विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने प्रदर्शन कर रहे सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने और सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की। लेकिन विरोध जारी रहने पर उन्होंने सदन की कार्यवाही दोपहर 1:10 बजे तक स्थगित कर दी।
दोपहर 1:10 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर विपक्षी सदस्यों ने फिर से विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। लगातार हंगामे के कारण सदन की सामान्य कार्यवाही नहीं हो सकी, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन को शाम चार बजे तक स्थगित कर दिया।