भीतरकनिका राष्ट्रीय उद्यान के मैंग्रोव वनों में हजारों स्थानीय (रेजिडेंट) पक्षियों के वार्षिक घोंसला निर्माण और प्रजनन मौसम की शुरुआत के साथ रौनक लौट आई है। मानसून के आगमन ने इस आर्द्रभूमि (वेटलैंड) पारिस्थितिकी तंत्र में नई जान फूंक दी है।
हाल की बारिश के बाद राष्ट्रीय उद्यान पक्षियों के लिए एक जीवंत आवास में बदल गया है। मैंग्रोव वनों में बड़ी संख्या में पक्षियों ने घोंसले बनाना शुरू कर दिया है। वन अधिकारियों के अनुसार, अनुकूल मौसम, प्रचुर मात्रा में भोजन और पर्याप्त जल उपलब्धता ने प्रजनन के लिए आदर्श परिस्थितियां तैयार की हैं।
भीतरकनिका में 10 से अधिक प्रजातियों के स्थानीय पक्षी घोंसले बनाने और अंडे देने के लिए पहुंच चुके हैं। इनमें प्रमुख रूप से ओपन-बिल्ड स्टॉर्क (खुली चोंच वाला सारस), लिटिल कॉर्मोरेंट, मीडियन एग्रेट, लार्ज एग्रेट, पर्पल हेरॉन, ग्रे हेरॉन, डार्टर, व्हाइट आइबिस और कैटल एग्रेट शामिल हैं।
भीतरकनिका के सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) मनस कुमार दास ने बताया कि राष्ट्रीय उद्यान के मथाडिया, दुर्गाप्रसाददिया और लक्ष्मीप्रसाददिया क्षेत्र के मैंग्रोव वनों में पक्षियों के बड़े-बड़े झुंडों ने घोंसले बनाना शुरू कर दिया है।
उन्होंने कहा कि मानसून का मौसम इन पक्षियों के प्रजनन के लिए सबसे उपयुक्त होता है। बारिश के ताजे पानी तथा नदियों और खाड़ियों के उफान से मछलियों, घोंघों और अन्य जलीय जीवों की भरपूर उपलब्धता सुनिश्चित होती है, जो नवजात चूजों के भोजन का प्रमुख स्रोत हैं।
घोंसला बनाने वाली इन कॉलोनियों की ओर गैर-प्रजनन वाले पक्षी भी आकर्षित हो रहे हैं, जिन्हें घोंसला स्थलों के आसपास बड़े समूहों में भोजन की तलाश करते देखा जा सकता है।
मैंग्रोव और अन्य पेड़ों पर हजारों घनी आबादी वाले घोंसले दिखाई देने लगे हैं। पक्षी सरकंडों और जलीय खरपतवार का उपयोग कर घोंसले बनाते हैं तथा उन्हें पानी की सतह से ऊपर तैयार करते हैं, ताकि अंडे बारिश और मानसून के दौरान बढ़ते जलस्तर से सुरक्षित रह सकें।
भीतरकनिका में हर वर्ष होने वाला यह घोंसला निर्माण और प्रजनन का मौसम एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिकीय घटना माना जाता है। यह इस अद्वितीय मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र के स्वस्थ और समृद्ध होने का संकेत भी है।