ओडिशा में राज्यसभा की चार सीटों के लिए वोटिंग हो रही है। विपक्षी बीजेडी ने सत्ताधारी बीजेपी पर "खरीद-फरोख्त" में शामिल होने का आरोप लगाया है। राज्य में 12 साल के अंतराल के बाद राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग हो रही है, क्योंकि इस बार चार सीटों के लिए पांच उम्मीदवार मैदान में हैं। बीजेपी की तरफ से पार्टी प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और मौजूदा राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार मैदान में हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं और उन्हें बीजेपी का समर्थन प्राप्त है। बीजेडी की तरफ संतृप्त मिश्र और जाने-माने यूरोलॉजिस्ट डॉ. दत्तेश्वर उम्मीदवार हैं, जिन्हें कांग्रेस और सीपीआई(एम) समर्थन कर रहे हैं। मतदान में दौरान क्रॉस-वोटिंग की भी संभावना है क्योंकि न तो सत्ताधारी बीजेपी और न ही विपक्षी बीजेडी के पास चौथी सीट जीतने के लिए जरूरी नंबर हैं। बीजेपी के 79 विधायक हैं और उसे तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है।
वहीं, 15 जनवरी को अपने दो विधायकों के निलंबन के बाद बीजेडी के 48 विधायक हैं। कांग्रेस के 14 विधायक और सीपीआई(एम) का एक विधायक है। ओडिशा में राज्यसभा के हिसाब से, एक सीट जीतने के लिए एक उम्मीदवार को 30 फर्स्ट प्रेफरेंस वोट चाहिए। बीजेपी के पास 82 सदस्यों का समर्थन है, इसलिए अपने दो उम्मीदवार चुनने के बाद उसके पास 22 सरप्लस वोट होंगे। इसी तरह, बीजेडी के पास अपना एक उम्मीदवार चुनने के बाद 18 सरप्लस वोट होंगे।
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