ओडिशा में बाढ़ की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। विशेष राहत आयुक्त (SRC) राजेश प्रभाकर पाटिल ने गुरुवार को बताया कि सुवर्णरेखा को छोड़कर राज्य की अधिकांश नदियों के जलस्तर में गिरावट का रुख देखा जा रहा है।
मीडियाकर्मियों को जानकारी देते हुए एसआरसी ने बताया कि राज्य के छह जिलों के 34 ब्लॉक बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, जिससे करीब 12.87 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। हालांकि, 87 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि 185 राहत केंद्रों में प्रभावित लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रभावित जिलों में बालेश्वर में करीब 28 हजार, भद्रक में 1.90 लाख और जाजपुर में 31 हजार लोग प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने बताया कि भद्रक और जाजपुर में बाढ़ की स्थिति में सुधार हो रहा है और अगले 12 घंटों में जलस्तर में और गिरावट आने की संभावना है। ओडीआरएएफ और एनडीआरएफ की टीमें लगातार बचाव एवं राहत कार्यों में जुटी हुई हैं। बैतरणी और सालंदी नदी के तटबंधों में हुए कटाव की मरम्मत का काम भी जारी है।
एसआरसी ने कहा कि बाढ़ का पानी पूरी तरह उतरने में अभी करीब तीन दिन और लग सकते हैं। राज्य की कई प्रमुख नदियां अब अपने खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं। एनएच-5 के पास बुढ़ाबलंग नदी का जलस्तर फिलहाल 5.76 मीटर है, जबकि यहां खतरे का निशान 8.13 मीटर है। इसी तरह जलका नदी 6.28 मीटर पर बह रही है, जबकि इसका खतरे का निशान 6.50 मीटर है। जेनापुर में ब्राह्मणी नदी का जलस्तर 21.38 मीटर है, जो 23 मीटर के खतरे के निशान से काफी नीचे है। वहीं, अखुआपदा में बैतरणी नदी 17.98 मीटर पर बह रही है, जबकि यहां खतरे का निशान 18.33 मीटर है।
उन्होंने बताया कि बालेश्वर जिले में सुवर्णरेखा नदी अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। राजघाट में इसका जलस्तर रात 3 बजे 11.82 मीटर तक पहुंच गया था, जबकि खतरे का निशान 10.36 मीटर है। हालांकि, 3 बजे अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद सुवर्णरेखा का जलस्तर अब धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन यह अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।