पुरी रथ यात्रा के दौरान हुई भगदड़ जैसी घटना, जिसमें दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी और करीब 100 लोग घायल हुए थे, पर चिंता जताते हुए ओडिशा मानवाधिकार आयोग (OHRC) ने राज्य सरकार को बाहुड़ा यात्रा के दौरान सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
यह निर्देश अधिवक्ता निशिकांत मिश्रा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद जारी किया गया। आयोग ने गृह विभाग के प्रमुख सचिव और पुरी जिला कलेक्टर को घटना पर विस्तृत जवाब दाखिल करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने को कहा है।
अपने आदेश में आयोग ने गृह विभाग, पुरी कलेक्टर और पुरी पुलिस अधीक्षक (एसपी) को निर्देश दिया है कि भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की बाहुड़ा यात्रा के दौरान भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद रखी जाए।
यह निर्देश 16 जुलाई को पुरी के ग्रैंड रोड स्थित मरीचीकोट चौक पर हुई अव्यवस्था के बाद जारी किया गया है।
बताया गया कि पहंडी अनुष्ठान के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु बैरिकेडिंग तोड़कर सड़क पर पहुंच गए, जिससे अफरा-तफरी मच गई और भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई।
घटना के बाद विपक्षी बीजू जनता दल (बीजेडी) ने राज्य सरकार से सभी घायल श्रद्धालुओं को उचित और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की थी।
आयोग ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को भी निर्देश दिया है कि सभी घायलों का समय पर और समुचित इलाज सुनिश्चित किया जाए।
आयोग ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, पुरी कलेक्टर, जिला मजिस्ट्रेट तथा सीडीएम एवं पीएचओ, पुरी घायल श्रद्धालुओं के समुचित उपचार की व्यवस्था करें। साथ ही गृह विभाग, पुरी कलेक्टर, जिला मजिस्ट्रेट और पुरी पुलिस अधीक्षक यह सुनिश्चित करें कि भगवान की बाहुड़ा यात्रा के दौरान इस तरह की कोई घटना दोबारा न हो।