ओडिशा में अग्नि सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की जांच के लिए चलाया गया एक महीने का ‘सुरक्षित ओडिशा, विकसित ओडिशा’ अभियान संपन्न हो गया है। 15 सितंबर को शुरू हुए इस अभियान के तहत अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, होटलों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और औद्योगिक क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच की गई।
अभियान के दौरान अग्नि सुरक्षा प्रणालियों में कमियों और दस्तावेजों में अनियमितताओं को लेकर राज्यभर के 3,404 प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए गए। इसके अलावा, स्वीकृत भवन नक्शे से अलग निर्माण करने वाले लगभग 200 प्रतिष्ठानों को भी अलग से नोटिस दिया गया।
अग्निशमन विभाग ने अग्नि सुरक्षा सेवाओं को अधिक पारदर्शी और सुलभ बनाने के लिए कई डिजिटल पहल भी शुरू की हैं। मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से लोग होटलों, अस्पतालों और बड़े भवनों को जारी अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्रों की जांच कर सकेंगे।
आपातकालीन बचाव कार्यों को बेहतर बनाने के लिए विभाग भवनों की 3डी मैपिंग भी कर रहा है। इसमें प्रवेश और निकास मार्गों, पानी के स्रोतों तथा अग्निशमन उपकरणों की स्थिति की जानकारी दर्ज की जाएगी। इससे आपात स्थिति में बचाव दल को जरूरी सुविधाओं और संसाधनों की पहचान करने में मदद मिलेगी।
अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र, अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) और अन्य आवेदनों से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे नागरिक और कारोबारी अब व्हाट्सऐप संदेश के जरिए विभाग से संपर्क कर सकेंगे।
इसके अलावा, अग्नि सुरक्षा से संबंधित समस्याओं के समाधान और विभागीय सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए भुवनेश्वर स्थित कमांड सेंटर में 24 घंटे का कंट्रोल रूम भी चालू कर दिया गया है।
अग्निशमन सेवा के आईजी उमाशंकर दाश ने कहा कि 15 सितंबर को शुरू किया गया ‘सुरक्षित ओडिशा, विकसित ओडिशा’ अभियान संपन्न हो गया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2036 तक विकसित ओडिशा के लक्ष्य को हासिल करने में अग्निशमन सेवा विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका होगी, क्योंकि आने वाले समय में अस्पतालों, शहरीकरण और परिवहन सुविधाओं का विस्तार होने की उम्मीद है।
दाश के अनुसार, अभियान के दौरान राज्यभर में अग्नि सुरक्षा प्रणालियों की कमियों और दस्तावेजों से जुड़ी अनियमितताओं के मामले सामने आए, जिसके तहत 3,404 प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए गए।