कटक स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल इंस्टीट्यूट ऑफ पीडियाट्रिक्स (शिशु भवन) में एक अत्याधुनिक बायोफायर डायग्नोस्टिक मशीन काम करने लगी है। इसके जरिए डॉक्टर बच्चों में गंभीर निमोनिया से जुड़े बैक्टीरिया और वायरस की पहचान करीब एक घंटे के भीतर कर सकेंगे। इस सुविधा का इस्तेमाल गंभीर निमोनिया के निदान और उपचार के तरीके को बेहतर बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे एक शोध कार्यक्रम के तहत किया जा रहा है। इसमें एडेनोवायरस से जुड़े मामलों को भी शामिल किया गया है। हाल ही में गंभीर निमोनिया से पीड़ित एक बच्चे पर इस रैपिड टेस्टिंग सुविधा का इस्तेमाल किया गया, जिसमें एक घंटे के भीतर रोगजनक की पहचान कर ली गई और उसके अनुसार उपचार शुरू किया गया।
बच्चों में इन्फ्लुएंजा, रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस (RSV), मेटाप्न्यूमोवायरस और एडेनोवायरस जैसे रोगजनकों के कारण वायरल निमोनिया के मामले सामने आते हैं। एडेनोवायरस विशेष रूप से छोटे बच्चों में गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। इसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे हो सकते हैं, इसलिए सही उपचार के लिए प्रयोगशाला जांच के जरिए इसकी पुष्टि महत्वपूर्ण होती है।
इससे पहले शिशु भवन में संक्रमण की आशंका वाले बच्चों से लिए गए नमूनों को जांच के लिए क्षेत्रीय चिकित्सा अनुसंधान केंद्र (RMRC), भुवनेश्वर भेजा जाता था। इस प्रक्रिया में करीब पांच दिन तक लग सकते थे। इस दौरान डॉक्टर अक्सर बच्चे की चिकित्सकीय स्थिति और उपलब्ध जानकारी के आधार पर उपचार शुरू कर देते थे।
नई बायोफायर सुविधा से रोगजनक की पहचान में लगने वाला समय काफी कम होने की उम्मीद है। मशीन के जरिए फेफड़ों से लिए गए ब्रोंकोएल्वियोलर लैवेज (BAL) फ्लूइड समेत विभिन्न नमूनों की जांच की जा सकती है। यह मशीन एक साथ 22 और 34 बीमारियों को कवर करने वाले टेस्ट पैनल की जांच करने में सक्षम है।
शिशु भवन में यह जांच मरीजों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निजी स्वास्थ्य संस्थानों में इसी तरह की जांच की लागत करीब 20,000 रुपये तक हो सकती है।
शिशु भवन को इस शोध परियोजना के लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) से 1.71 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है। यह राशि केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं, बायोफायर मशीन की खरीद पर 37.50 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।
शिशु भवन में इससे पहले 2023-24 के दौरान एडेनोवायरस को लेकर शोध किया गया था। वर्तमान परियोजना के तहत इस कार्य को आगे बढ़ाते हुए गंभीर निमोनिया और संबंधित संक्रमण से प्रभावित बच्चों के उपचार के बेहतर तरीकों का अध्ययन किया जा रहा है।
यह शोध शिशु भवन के अधीक्षक प्रोफेसर डॉ. सुनील कुमार अग्रवाल के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। शिशु भवन की ओर से प्रोफेसर डॉ. विजय कुमार मेहर इस परियोजना के मुख्य शोधकर्ता हैं। उनके साथ बाल रोग विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. सार्थक नायक, माइक्रोबायोलॉजी विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. सौम्याशिवानी साहू और मल्टी-डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट के एक वैज्ञानिक शोधकर्ता भी इस परियोजना में सहयोग कर रहे हैं।