नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर हुए छात्र आंदोलन के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन में शामिल सामान्य छात्रों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी। मंगलवार देर रात जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है। हालांकि जिन लोगों के खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं या जिनका आपराधिक रिकॉर्ड है, उन्हें इस राहत का लाभ नहीं मिलेगा। 24 जुलाई को नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में वामपंथी छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किया था। इस आंदोलन में कॉकरोच जनता पार्टी के सदस्य भी शामिल हुए थे। प्रदर्शन के दौरान धर्मतला स्थित डोरिना क्रॉसिंग के पास अचानक स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने जूते, पत्थर और पानी की बोतलें फेंकीं। इस घटना में कई पत्रकारों के साथ भी कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया गया। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू करते हुए कुल 16 लोगों को गिरफ्तार किया।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा कि नीट आंदोलन में शामिल सामान्य छात्रों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि जिन लोगों के खिलाफ पहले से आपराधिक रिकॉर्ड या लंबित आपराधिक मामले हैं, उन्हें इस सरकारी राहत का लाभ नहीं मिलेगा। सरकार के इस फैसले के बाद आंदोलन में शामिल सामान्य छात्रों के खिलाफ कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की आशंका काफी हद तक कम हो गई है। हालांकि जानकारों का मानना है कि गिरफ्तार किए गए 16 आरोपियों में यदि किसी के खिलाफ पहले से कोई आपराधिक मामला दर्ज है, तो उसके मामले में कानूनी प्रक्रिया पहले की तरह जारी रह सकती है।