तिरंगे की मनमोहक सजावट, कदमताल करते मार्चिंग दस्तों और देशभक्ति के उल्लास के बीच ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने आज कटक के बारबाटी स्टेडियम में 77वें गणतंत्र दिवस के भव्य राज्यस्तरीय समारोह के दौरान राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
बड़ी संख्या में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने भारत के संविधान की अटूट शक्ति को रेखांकित किया, देश के संस्थापक नेताओं को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में पिछले एक दशक में हुए परिवर्तनकारी विकास को उजागर किया। उत्कल संस्कृति की धरोहर और “सिल्वर सिटी” कटक के ऐतिहासिक हृदय से बोलते हुए उन्होंने इस स्थल को ओडिशा की समृद्ध विरासत और सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।
उन्होंने कहा कि आज हम कटक के उस विशाल हृदय पर खड़े हैं, जिसने गर्व के साथ अपने इतिहास का भार अपने कंधों पर उठाया है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि संविधान ने न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों के माध्यम से भारतीयों को एकजुट किया है और देश को विश्व पटल पर एक विशिष्ट पहचान दी है।
भारत की लोकतांत्रिक यात्रा पर विचार करते हुए मुख्यमंत्री ने पिछले 78 वर्षों से अधिक समय तक (1970 के दशक के मध्य में आपातकाल की अवधि को छोड़कर, जिसे उन्होंने “एक काला अध्याय” कहा) निर्बाध लोकतांत्रिक शासन का उल्लेख किया। उन्होंने डॉ. आंबेडकर की 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में वर्ष 2015 से 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाने की पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की और 2014 में संसद भवन में प्रवेश करते समय संविधान को नमन करने के उनके प्रतीकात्मक भाव को भी याद किया।
मुख्यमंत्री ने पिछले 11 वर्षों को संवैधानिक व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण और तीव्र विकास का काल बताया और नागरिकों से अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के प्रति भी सतर्क रहने का आह्वान किया। समारोह में प्रभावशाली परेड, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और उत्कृष्ट अधिकारियों व नागरिकों का सम्मान किया गया, जिससे बारबाटी स्टेडियम में उत्साहपूर्ण माहौल बना रहा। मुख्यमंत्री माझी का संबोधन एकता, संवैधानिक गौरव और ओडिशा व भारत के उज्ज्वल भविष्य के प्रति आशावाद से ओतप्रोत रहा।