ओडिशा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) योगेश बहादुर खुड़ानिया ने गंजाम जिले के 32 वर्षीय युवक की मौत के मामले में मानवाधिकार संरक्षण प्रकोष्ठ (HRPC) से जांच कराने के आदेश दिए हैं। युवक की मौत के बाद पुलिस हिरासत में यातना दिए जाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मृतक की पहचान गंजाम जिले के सुबुलिया गांव निवासी सुशांत साहू के रूप में हुई है। सोमवार को ब्रह्मपुर के एक अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने हिरासत में सुशांत के साथ बेरहमी से मारपीट की, जिसके कारण उनकी हालत गंभीर हो गई और अंततः उनकी मौत हो गई।
परिवार के अनुसार, शारीरिक रूप से दिव्यांग और दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करने वाले सुशांत को 25 मई को पत्थर विस्फोट (स्टोन ब्लास्टिंग) से जुड़े एक मामले में पुलिस ने हिरासत में लिया था। आरोप है कि उन्हें कई दिनों तक कविसूर्यनगर थाने में रखा गया और शनिवार को गंभीर अवस्था में परिवार को सौंपा गया। इसके बाद उन्हें पहले आस्का के अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में ब्रह्मपुर रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
सुशांत की पत्नी ममाजिन प्रधान ने आरोप लगाया कि कार्यस्थल पर हुई मामूली कहासुनी के बाद पुलिस उन्हें उठाकर ले गई थी। उनका दावा है कि हिरासत में उनके पति की बुरी तरह पिटाई की गई, जिससे पूरे शरीर पर फफोले पड़ गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके ऊपर गर्म पानी डाला था। परिवार का कहना है कि उन्हें लगभग एक सप्ताह तक यातनाएं दी गईं और फिर गंभीर हालत में छोड़ दिया गया।
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोग हिरासत में यातना और मौत के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
मामले का संज्ञान लेते हुए डीजीपी योगेश बहादुर खुड़ानिया ने एचआरपीसी को कविसूर्यनगर थाना कांड संख्या 342/2026 तथा बैद्यनाथपुर थाना अप्राकृतिक मृत्यु (यूडी) कांड संख्या 412/2026 की निष्पक्ष जांच करने का निर्देश दिया है। दोनों मामले सुशांत साहू की मौत से जुड़े हुए हैं।