ओडिशा सरकार ने ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत आने वाली पहाड़ी क्षेत्रों की सड़कों में भूस्खलन की संभावना वाले मार्गों की पहचान करने और उन्हें रोकने के उपायों से जुड़े प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। इन प्रस्तावों को वर्ष 2026-27 के लिए राज्य आपदा न्यूनीकरण कोष (SDMF) के तहत वित्तीय सहायता के लिए भेजा जाएगा।
ग्रामीण कार्य विभाग के अभियंता-प्रमुख कार्यालय की ओर से जारी पत्र में कोरापुट, जैपुर, सुनाबेड़ा, मलकानगिरी-1 एवं 2, नवरंगपुर-1 एवं 2, बारीपदा, करंजिया, रायरंगपुर, उदला, मोहना, रायगड़ा, गुनुपुर और गजपति सहित विभिन्न डिवीजनों के अधीक्षण अभियंताओं और कार्यपालक अभियंताओं को निर्देश दिया गया है कि वे उन सड़कों को प्राथमिकता दें, जहां दक्षिण-पश्चिम मानसून या भारी बारिश के दौरान बार-बार भूस्खलन और ढलान खिसकने जैसी घटनाएं होती हैं।
ऐसी घटनाओं के कारण अक्सर महत्वपूर्ण बस्तियों का संपर्क टूट जाता है, आवागमन बाधित होता है, सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचता है और स्थानीय समुदायों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
सरकार ने इस बात पर जोर दिया है कि इन सड़कों को इस तरह विकसित किया जाना चाहिए कि वे भारी बारिश का सामना कर सकें और उन्हें कम से कम रखरखाव की आवश्यकता हो, ताकि आपदा के समय वे जीवनरेखा के रूप में काम कर सकें।
अधिकारियों से कहा गया है कि वे अपने प्रस्तावों में स्थल की तकनीकी आवश्यकताओं के आधार पर जरूरी सुरक्षा उपायों को शामिल करें। इनमें रिटेनिंग वॉल (सुरक्षा दीवार), ढलान स्थिरीकरण, उचित जल निकासी व्यवस्था, चट्टान गिरने से बचाव के उपाय, स्टोन पिचिंग और जैव-इंजीनियरिंग तकनीक जैसे उपाय शामिल हैं।
सभी व्यवहार्य प्रस्ताव निर्धारित प्रारूप में आवश्यक जानकारी के साथ सात दिनों के भीतर संबंधित मुख्य निर्माण अभियंताओं के माध्यम से प्रस्तुत किए जाने हैं। प्रस्तावों की हार्ड और सॉफ्ट दोनों प्रतियां जमा करनी होंगी, जिन्हें आगे की कार्रवाई और SDMF के तहत वित्तीय स्वीकृति के लिए सरकार को भेजा जाएगा।