करीब चार दशकों (40 साल) तक बस्तर का इलाका नक्सलियों के कब्जे में था। इस वजह से यहां के लोगों ने सालों तक दुख और डर झेला। नक्सलियों को खत्म करने के लिए पुलिस ने बस्तर के जंगलों में कई सुरक्षा कैंप बनाए और वहां पैरामिलिट्री फोर्स (सुरक्षाबलों) को तैनात किया। अब बस्तर से सशस्त्र नक्सलवाद पूरी तरह खत्म हो चुका है और नक्सलियों का खौफ समाप्त हो गया है। ऐसे में सुरक्षा कैंप को अब ग्रामीणों के विकास के लिए जोड़ा जा रहा है।
बस्तर में सुरक्षाबलों के सैकड़ों कैंप मौजूद हैं। अब सरकार इन कैंपों को ग्रामीणों के विकास और मदद के लिए इस्तेमाल करने जा रही है। जिसकी शुरुआत 18 मई को देश के गृहमंत्री अमित शाह के हाथों होगी। नई योजना की शुरुआत के बाद अब ये केंद्र जनसेवा केंद्र के रूप में विकसित होंगे।
पहले ये कैंप सिर्फ नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन के लिए थे। अब ये स्थानीय लोगों और जवानों को आपस में जोड़ने का काम करेंगे। सरकार की नई रणनीति के तहत हर सुरक्षा कैंप के 3 से 4 बैरकों (कमरों) को 'जन समस्या निवारण' और 'जनसुविधा केंद्र' में बदला जाएगा। यानी अब एक ही कैंप के अंदर जवान सुरक्षा भी करेंगे और साथ-साथ बस्तर के विकास का काम भी चलेगा।