ओडिशा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि 12वीं सदी के श्री जगन्नाथ मंदिर, पुरी के रत्न भंडार की कथित गुम चाबी मामले पर जस्टिस रघुबीर दास आयोग की रिपोर्ट आगामी विधानसभा सत्र में सदन के पटल पर रखी जाए।
एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश हरीश टंडन और न्यायमूर्ति एम.एस. रमण की खंडपीठ ने कहा कि आयोग की यह रिपोर्ट, जो आयोगों की जांच अधिनियम 1952 के प्रावधानों के तहत सौंपी गई है, बिना किसी देरी के विधानसभा में प्रस्तुत की जानी चाहिए। अदालत ने कहा कि इस मामले में कोई “निष्क्रियता” स्वीकार्य नहीं है और इसे राज्य का “निर्धारित कर्तव्य” बताया।
पीठ ने सरकार को यह भी निर्देश दिया कि रत्न भंडार की नवीनतम सूची का 1978 में तैयार सूची से मिलान करने की प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी की जाए। अदालत ने उल्लेख किया कि 1978 की सूची में दर्ज आभूषण और कीमती वस्तुएं वर्तमान समिति द्वारा तैयार सूची से मेल खाती हैं।
रत्न भंडार, जो मंदिर का खजाना है, माना जाता है कि इसमें भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को सदियों से श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित अमूल्य स्वर्ण आभूषण, दुर्लभ रत्न, मोती, हीरे, चांदी के सामान और अन्य सजावटी भेंटें सुरक्षित हैं।
यह विवाद पांच जून 2018 से जुड़ा है, जब तत्कालीन नवीन पटनायक सरकार ने रत्न भंडार के भीतरी कक्ष की चाबी उपलब्ध न होने की खबरों पर जन आक्रोश के बाद न्यायिक जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद जस्टिस रघुबीर दास आयोग का गठन किया गया था ताकि गुम या कथित तौर पर खोई चाबियों के हालात की जांच की जा सके। आयोग ने अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी थी।
सरकार के अनुसार, रिपोर्ट की समीक्षा की गई थी और निर्णय लिया गया था कि जून 2024 विधानसभा चुनाव के बाद बनने वाली कैबिनेट के समक्ष इसे रखा जाएगा। हालांकि हाईकोर्ट ने अब स्पष्ट कर दिया है कि रिपोर्ट को विधानसभा में पेश करने की वैधानिक आवश्यकता बिना और देरी के पूरी की जानी चाहिए।
पीठ ने शीघ्र अनुपालन की अपेक्षा जताते हुए कहा कि सूची मिलान प्रक्रिया को अंतिम रूप देने या आयोग की सिफारिशों पर कार्रवाई करने में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जानी चाहिए और आशा व्यक्त की कि राज्य सरकार आवश्यक तत्परता के साथ आगे बढ़ेगी।