बाहुड़ा यात्रा को लेकर लोकसेवा भवन में बुधवार को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में प्रशासन, पुलिस और विभिन्न विभागों की तैयारियों का जायजा लिया गया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। कानून-व्यवस्था से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और हर स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों को भीड़ प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। सीसीटीवी कैमरों और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के जरिए भीड़ की हर गतिविधि पर नजर रखने और जरूरत पड़ते ही मौके पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।
मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं से प्रशासन और पुलिस के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील करते हुए कहा कि सभी के सहयोग से ही बाहुड़ा यात्रा सुरक्षित और सुचारु रूप से संपन्न हो सकेगी।
समीक्षा बैठक में बताया गया कि रथयात्रा से अब तक भगवान जगन्नाथ के सभी अनुष्ठान लगातार बारिश और प्रतिकूल मौसम के बावजूद शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए हैं। मुख्यमंत्री ने सेवायतों, पुलिस, प्रशासन और सभी कर्मचारियों के समर्पण की सराहना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाहुड़ा यात्रा के बाद सुनाबेश और नीलाद्री बीजे जैसे महत्वपूर्ण आयोजन भी होने हैं। ऐसे में सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ पूरी सतर्कता बरतें, ताकि हर आयोजन निर्विघ्न और सुरक्षित ढंग से संपन्न हो।
मुख्यमंत्री ने रथयात्रा के दौरान स्वास्थ्य संबंधी कारणों से दो श्रद्धालुओं की मृत्यु पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री राहत कोष से मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी।
श्रीमंदिर के मुख्य प्रशासक डॉ. अरविंद पाढ़ी ने रथयात्रा प्रबंधन की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। पुलिस महानिदेशक वाई.बी. खुरानिया, अग्निशमन सेवा महानिदेशक डॉ. सुधांशु षडंगी तथा पुलिस आधुनिकीकरण के अतिरिक्त महानिदेशक सौमेंद्र प्रियदर्शी ने पुलिस प्रशासन की विभिन्न तैयारियों की जानकारी दी। बैठक में कानून एवं लोक निर्माण मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन, मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रकाश मिश्र, मुख्य सचिव अनु गर्ग तथा विकास आयुक्त डी.के. सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे और बाहुड़ा यात्रा तथा सुनाबेश के सफल संचालन को लेकर अपने सुझाव प्रस्तुत किए।