नीट में कथित धांधली और फर्जी प्रमाणपत्र के जरिए मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के मामले में आर्थिक अपराध इकाई यानी ईओयू की जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। अब तक डॉक्टरों और कथित बिचौलियों पर कार्रवाई के बाद फर्जी सर्टिफिकेट के सहारे मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले छात्रों पर भी जांच एजेंसी की नजर है। जांच के दौरान अगर किसी छात्र के प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए जाते हैं तो ईओयू उनके दस्तावेजों की गहन जांच करा सकती है। इसमें जाति, दिव्यांगता, आय या अन्य आरक्षण से जुड़े प्रमाणपत्रों की सत्यता की जांच शामिल हो सकती है। संबंधित विभागों और मेडिकल संस्थानों से भी प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया जा सकता है। ईओयू यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि फर्जी प्रमाणपत्र किसी छात्र ने खुद बनवाया था या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। जांच में यह भी देखा जा सकता है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने,सत्यापन कराने या दाखिले की प्रक्रिया में किसी व्यक्ति अथवा संस्थान की भूमिका तो नहीं रही।
मामले में संदिग्ध छात्रों से पूछताछ के साथ उनके दाखिले से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले जा सकते हैं। एजेंसी फर्जीवाड़े के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड और दस्तावेजों की भी पड़ताल कर सकती है। अगर जांच में प्रमाणपत्र फर्जी साबित होते हैं तो संबंधित छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ उनके दाखिले पर भी असर पड़ सकता है। वहीं, फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने और इस पूरे खेल में सहयोग करने वालों पर भी कार्रवाई की संभावना है।
नीट से जुड़े इस मामले में अब जांच सिर्फ डॉक्टरों तक सीमित नहीं रहने के संकेत हैं। ईओयू की अगली कार्रवाई से फर्जी प्रमाणपत्र के जरिए मेडिकल दाखिले के पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।