माओवादी नेता एब्लेम होनेंज उर्फ प्रभु ने मंगलवार को राउरकेला पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। यह प्रतिबंधित संगठन को छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वाले कैडरों की एक और मिसाल है। प्रभु, पड़ोसी राज्य झारखंड के छोटानागरा थाना क्षेत्र अंतर्गत हलामूली गांव का निवासी है। वह करीब दो साल पहले, नाबालिग अवस्था में, माओवादी संगठन से जुड़ा था। संगठन में रहते हुए वह शीर्ष माओवादी नेता अनमोल के नेतृत्व वाली टीम के साथ काम करता था।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रभु को संगठन के भीतर कई जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। उसके कार्यों में हथियार ढोना, पुलिस और सुरक्षा बलों की रेकी करना, माओवादी कैंपों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने में मदद करना, तथा माओवादी हिंसक गतिविधियों के दौरान लॉजिस्टिक समर्थन प्रदान करना शामिल था।
इन गतिविधियों में शामिल रहने के बावजूद, बाद में प्रभु ने माओवादी संगठन से नाता तोड़ने और अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्णय लिया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पश्चिमी रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) बृजेश राय ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी को सरकार की पुनर्वास एवं आत्मसमर्पण नीति के तहत हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि यह आत्मसमर्पण माओवादी कैडरों के बीच बढ़ती असंतोष की भावना को दर्शाता है और जो लोग हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होना चाहते हैं, उन्हें मौजूदा सरकारी योजनाओं के तहत प्रोत्साहित और समर्थन दिया जाएगा।