ओडिशा में केजी से पीजी तक निःशुल्क शिक्षा योजना की एसओपी जारी

  • Jul 14, 2026
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भुवनेश्वर,14 जुलाईः

ओडिशा सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी 'ज्ञानोदयशिक्षारु समृद्धि योजना' के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) जारी कर दी है। इसके साथ ही मौजूदा शैक्षणिक सत्र से केजी से पीजी तक निःशुल्क शिक्षा कार्यक्रम के क्रियान्वयन का रास्ता साफ हो गया है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी एसओपी में पात्रता, शुल्क प्रतिपूर्ति (रिइम्बर्समेंट), फीस में छूट और योजना के संचालन से जुड़े सभी प्रमुख प्रावधानों का विस्तृत उल्लेख किया गया है, ताकि आर्थिक तंगी किसी भी छात्र की उच्च शिक्षा में बाधा न बने।

 उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने मंगलवार को कहा कि एसओपी से योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आर्थिक कारणों से कोई भी पात्र छात्र शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजना के दायरे में आने वाले कॉलेज मनमाने ढंग से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे।

 इस योजना के तहत अब तक केजी से कक्षा 8 तक मिलने वाली निःशुल्क शिक्षा का दायरा बढ़ाकर कक्षा 9 से 12 तथा सरकारी विश्वविद्यालयों, सरकारी कॉलेजों और सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों में संचालित नियमित स्नातक (यूजी) और स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों तक कर दिया गया है।

राज्य सरकार के अनुसार, इस पहल से हर वर्ष 32 लाख से अधिक छात्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

 एसओपी के अनुसार, प्रथम चरण की प्रवेश प्रक्रिया के दौरान जिन छात्रों ने पहले ही प्रवेश शुल्क जमा कर दिया है, उन्हें पूरी राशि वापस की जाएगी। यह धनराशि सीधे उसी बैंक खाते में भेजी जाएगी, जिससे शुल्क का भुगतान किया गया था। सरकार का कहना है कि योजना लागू होने से पहले फीस जमा करने वाले छात्रों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।

 शैक्षणिक संस्थानों को आर्थिक सहायता देने के लिए सरकार ने चरणबद्ध प्रतिपूर्ति व्यवस्था लागू की है। प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्वीकृत राशि का 10 प्रतिशत कॉलेजों को दिया जाएगा। इसके बाद 15 प्रतिशत दूसरी किस्त के रूप में जारी किया जाएगा।

 शेष 75 प्रतिशत राशि शैक्षणिक वर्ष के दौरान 25-25 प्रतिशत की तीन समान किस्तों में जारी की जाएगी, ताकि संस्थानों के संचालन में किसी प्रकार की वित्तीय परेशानी न हो।

 योजना का लाभ लेने के लिए छात्रों के लिए कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होगी। हालांकि, विशेष परिस्थितियों में इसे 65 प्रतिशत तक शिथिल किया जा सकता है। निर्धारित न्यूनतम उपस्थिति से कम रहने वाले छात्र योजना का लाभ लेने के पात्र नहीं होंगे।

 योजना के तहत पात्र छात्रों को प्रवेश शुल्क, पुनः प्रवेश शुल्क (री-एडमिशन फीस) और संस्थान द्वारा लिए जाने वाले अन्य निर्धारित शुल्क नहीं देने होंगे।

 हालांकि, परीक्षा शुल्क छात्रों को स्वयं वहन करना होगा। इसके अलावा छात्रावास (हॉस्टल) शुल्क भी योजना के दायरे में शामिल नहीं है और हॉस्टल में रहने वाले छात्रों को इसका भुगतान अलग से करना होगा।

 एसओपी के अनुसार, व्यावसायिक (प्रोफेशनल) और तकनीकी (टेक्निकल) पाठ्यक्रम, स्ववित्तपोषित (सेल्फ-फाइनेंसिंग) कार्यक्रम, निजी गैर-सहायता प्राप्त संस्थान तथा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत संचालित संस्थान इस योजना के दायरे में शामिल नहीं होंगे।

फीस बढ़ाने पर रोक

सरकार ने राज्य के विश्वविद्यालयों, सरकारी कॉलेजों और सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों को योजना के तहत आने वाले नियमित पाठ्यक्रमों की फीस बढ़ाने पर रोक लगा दी है। यदि किसी संस्थान को फीस संशोधन करना होगा, तो इसके लिए फीस रेगुलेशन कमेटी की पूर्व स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा।

राज्य सरकार का कहना है कि 'ज्ञानोदयशिक्षारु समृद्धि योजना' का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण और सुलभ शिक्षा को बढ़ावा देना तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए स्कूल स्तर से लेकर स्नातकोत्तर शिक्षा तक की राह आसान बनाना है। नई एसओपी लागू होने के बाद सरकार को उम्मीद है कि ओडिशा में शिक्षा के अवसरों का विस्तार होगा और अधिक से अधिक छात्र आर्थिक बाधाओं से मुक्त होकर अपनी पढ़ाई पूरी कर सकेंगे।

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