पश्चिम बंगाल में चुनाव लंबे समय से हिंसा, डराने‑धमकाने और गड़बड़ियों की छाया में रहे हैं, लेकिन इस बार चुनाव आयोग बेहद सख्त नजर आ रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने साफ कहा है कि मतदाताओं को पूरी तरह भयमुक्त माहौल दिया जाएगा। उनके मुताबिक, इस बार चुनाव हिंसा, धमकी, फर्जी मतदान, बूथ कैप्चरिंग या किसी भी तरह की अनियमितता से मुक्त होंगे। परदे के पीछे चुनाव आयोग ने कड़े कदम उठाने की तैयारी कर ली है। सभी पोलिंग अधिकारियों और रिटर्निंग अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और यह स्पष्ट कर दिया गया है कि किसी भी तरह के उल्लंघन पर ‘जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई जाएगी। आयोग ने साफ संदेश दिया है कि लापरवाही या मिलीभगत पाए जाने पर तत्काल कड़ी कार्रवाई होगी।
चुनाव प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए मतदान केंद्रों पर AI‑सक्षम सीसीटीवी कैमरों से रियल‑टाइम निगरानी की जाएगी। आयोग के सूत्रों के अनुसार, यदि कैमरे बंद पाए जाते हैं या किसी तरह की संदिग्ध गतिविधि रिकॉर्ड होती है, तो उस पोलिंग बूथ पर तुरंत पुनर्मतदान (रीपोल) का आदेश दिया जा सकता है। इसके जरिए मतदान की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, यदि रीपोल के दौरान भी गड़बड़ियां जारी रहीं, तो पूरे निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव काउंटरमांड किया जा सकता है। इस बार सुरक्षा व्यवस्था भी अभूतपूर्व बताई जा रही है। आयोग ने प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव किए हैं, जिनमें मुख्य सचिव, डीजीपी, गृह सचिव, कोलकाता पुलिस आयुक्त और कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के तबादले शामिल हैं। पूरे राज्य में करीब 2400 सीएपीएफ कंपनियों की तैनाती की गई है, जो हाल के वर्षों में चुनाव के दौरान सबसे बड़े सुरक्षा अभियानों में से एक मानी जा रही है।