छत्तीसगढ़ में धर्मातरण कानून लागू हो गया है। 2026 के विधानसभा के बजट सत्र में 18 मार्च को इस विधेयक के पटल पर रखा गया था। सदन से पास होने के बाद इसे राज्यपाल के पास अनुमोदन के लिए भेजा गया। राज्यपाल रमेन डेका ने धर्मातरण के लिए लाए गए विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके बाद से अब राज्य में इसे कानूनी दर्जा मिल गया है। इस कानून के बन जाने से राज्य में धर्मातरण अवैध माना जाएगा।
ये है प्रावधान जानिए
-बलपूर्वक या धोखे से किए गए धर्मांतरण पर रोक लगेगी।
-डिजिटल माध्यमों और प्रलोभन के जरिए होने वाले धर्म परिवर्तन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
-कानून के अनुसार बल, प्रलोभन, दबाव, झूठी जानकारी या कपटपूर्ण तरीके से धर्म परिवर्तन कराना अब प्रतिबंधित हो गया।
-कोई स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी को पहले से सूचना देनी होगी।
-प्रस्तावित धर्म परिवर्तन की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी।
-30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का प्रावधान होगा।
-पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा।
-अवैध धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 वर्ष तक की जेल और कम से कम 5 लाख जुर्माना लगेगा।
-यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से है, तो सजा 10 से 20 वर्ष तक की जेल और कम से कम 10 लाख का जुर्माना होगा।
-सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख जुर्माना लगेगा।
धर्मांतरण की स्पष्ट परिभाषा
19 मार्च 2026 के सदन में पेश किए गए धर्मांतरण बिल में सभी प्रावधान स्पष्ट किए गए थे। इस विधेयक के तहत अवैध धर्मांतरण में किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध मनोवैज्ञानिक दबाव या शारीरिक बल (प्रपीड़न) के माध्यम से धर्म बदलने के लिए मजबूर करना शामिल है। कानून में "प्रलोभन" के दायरे को भी काफी बढ़ाया गया है। अब नकद उपहार, रोजगार का वादा, मुफ्त शिक्षा, बेहतर जीवनशैली का प्रलोभन या किसी धर्म के रीति-रिवाजों को दूसरे के विरुद्ध गलत तरीके से प्रस्तुत करना भी अपराध की श्रेणी में आएगा। विशेष रूप से, यदि कोई व्यक्ति अपने पैतृक धर्म या आस्था में वापस आता है, तो इसे इस अधिनियम के तहत धर्मांतरण नहीं माना जाएगा।
इस नए नियम के अनुसार, अब धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया काफी सख्त होगी। कोई भी व्यक्ति जो अपना धर्म बदलना चाहता है, उसे निर्धारित प्रारूप में उस क्षेत्र के सक्षम प्राधिकारी (जिला मजिस्ट्रेट या अधिकृत अधिकारी) को एक घोषणा पत्र सौंपना होगा।