तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में नेतृत्व और संगठन को लेकर जारी विवाद अब चुनाव आयोग तक पहुंच गया है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने भारत निर्वाचन आयोग के समक्ष पार्टी पर अपना दावा पेश किया। दूसरी ओर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले खेमे ने चुनाव आयोग द्वारा निष्कासित नेताओं को सुनवाई का अवसर दिए जाने पर सवाल उठाए और इसे आयोग की प्रक्रिया के विपरीत बताया। भारत निर्वाचन आयोग ने ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी दोनों गुटों को पत्र भेजकर पार्टी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं और संगठनात्मक चुनावों से जुड़े दावों तथा प्रति-दावों पर जवाब मांगा है। आयोग ने दोनों पक्षों को 6 जुलाई शाम 5:30 बजे तक अपना पक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों से मुलाकात की। बैठक के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ ने उनकी बात धैर्यपूर्वक सुनी और उन्हें उम्मीद है कि आयोग जल्द ही इस मामले पर आगे की कार्रवाई करेगा। उन्होंने बताया कि 22 जून को कोलकाता में आयोजित विशेष संगठनात्मक बैठक के बाद आयोग को लिखित सूचना दी गई थी और उसी के आधार पर मुलाकात का समय मांगा गया था।
ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि उनका गुट ही वास्तविक अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) है। उन्होंने कहा कि पार्टी के दो-तिहाई से अधिक विधायक, कई पार्षद, नगर निकाय प्रतिनिधि और जिला परिषद सदस्य उनके साथ हैं। उनका आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यक्तिपूजा और वंशवादी राजनीति के विरोध में है। पश्चिम बंगाल की जनता वंशवाद की राजनीति का समर्थन नहीं करती। उन्होंने यह भी कहा कि अरूप राय और जावेद खान पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल हैं और यह आंदोलन सामूहिक विचारधारा का परिणाम है।
जब उनसे भारतीय जनता पार्टी से संभावित नजदीकी को लेकर सवाल किया गया तो ऋतब्रत बनर्जी ने स्पष्ट कहा कि उनका गुट भाजपा के खिलाफ है और किसी प्रकार का गठजोड़ नहीं कर रहा।