मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि ओडिशा के हर गांव और मोहल्ले में विद्यारंभ पर्व (शिक्षा आरंभ उत्सव) को एक त्योहार के रूप में मनाया जा रहा है, जिससे अभिभावक अपने बच्चों का स्कूलों में नामांकन कराने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
राज्यस्तरीय प्रवेश उत्सव एवं खड़ी छुआ कार्यक्रम-2026 को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल बच्चों की शिक्षा को लेकर अभिभावकों में उत्साह पैदा कर रही है। यह कार्यक्रम यहां राजभवन परिसर स्थित सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री माझी ने बच्चों से स्लेट पर चॉक से ‘मा’ और ‘बापा’ (मां और पिता) लिखवाकर प्रतीकात्मक रूप से उनकी शिक्षा की शुरुआत कराई।
एक अनुभवी शिक्षक या परिवार के बुजुर्ग की तरह बच्चों से आत्मीय संवाद करते हुए उन्होंने उनसे सरल और स्नेहपूर्ण प्रश्न पूछे, जैसे— “तुम्हारी मां का नाम क्या है?”, “पिता का नाम क्या है?”, “मामा का घर कहां है?” और “यहां आने से पहले क्या खाया?” इस भावनात्मक संवाद के माध्यम से मुख्यमंत्री ने बच्चों के मन से डर दूर कर शिक्षा की शुरुआत को आनंददायक बनाने का प्रयास किया।
मुख्यमंत्री ने ‘निपुण ओडिशा’ और ‘पढ़िबा, गढ़िबा ओडिशा’ अभियान के तहत तैयार विषय-आधारित शिक्षण सामग्री की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण करते हुए विद्यार्थियों के लिए तैयार नवाचारी और बाल-अनुकूल शिक्षण सामग्री की सराहना की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बच्चों को शैक्षणिक सहायता किट वितरित की। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा लगाए गए चित्रकला स्टॉलों का भी निरीक्षण किया और उनकी रचनात्मकता की प्रशंसा की। बच्चों ने अपनी बनाई पेंटिंग्स मुख्यमंत्री को भेंट स्वरूप प्रदान कीं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार का लक्ष्य स्कूलों में बच्चों का 100 प्रतिशत प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करना है। नई शिक्षा नीति के अनुरूप आंगनवाड़ी केंद्रों को धीरे-धीरे शिशु वाटिका (प्री-स्कूल केंद्रों) के साथ एकीकृत किया जाएगा।
मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि पत्रकार सरकार की योजनाओं और आम जनता के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभाते हैं। उन्होंने मीडिया से शिक्षा के महत्व पर व्यापक जनजागरूकता फैलाने की अपील करते हुए कहा, “शिक्षा ही वास्तविक संपत्ति है। अपने-अपने मीडिया मंचों के माध्यम से इस शिक्षा अभियान को जनआंदोलन बनाइए।
कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों और शिक्षाविदों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “बच्चों के साथ अपने बच्चों जैसा स्नेह और प्रेम रखें। उनकी प्रतिभा को सही दिशा दें और उनके सर्वांगीण विकास के लिए ईमानदारी से प्रयास करें।”
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने हरी झंडी दिखाकर शिक्षा जागरूकता रथ (शिक्षा सचेतनता रथ) को रवाना किया।