ओडिशा सरकार ने अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डालने वाली मनमानी प्रथाओं को रोकने के लिए निजी स्कूलों की कड़ी निगरानी करने का निर्णय लिया है। स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड ने उन संस्थानों को कड़ी चेतावनी दी है जो महंगी, स्वयं प्रकाशित या स्कूल-विशेष किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव बनाते हैं।
इस मुद्दे पर बोलते हुए मंत्री गोंड ने कहा कि ऐसी प्रथाएं राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की भावना के खिलाफ हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब निजी स्कूलों के लिए एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों को अपनाना अनिवार्य होगा, क्योंकि ये किताबें किफायती होने के साथ-साथ शिक्षा में गुणवत्ता और एकरूपता सुनिश्चित करती हैं।
मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अभिभावकों के शोषण के मामलों को बेहद गंभीरता से ले रही है। कुछ निजी शैक्षणिक संस्थान केवल मुनाफे के लिए बच्चों को अपनी प्रकाशित किताबें खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। यह पूरी तरह अस्वीकार्य है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विरुद्ध है। बच्चों को एनसीईआरटी की किताबों से ही पढ़ाई करनी चाहिए, जो उचित कीमत पर आसानी से उपलब्ध हैं।”
लंबे समय से अभिभावक शिकायत कर रहे थे कि कई निजी स्कूल उन्हें महंगी किताबें और अध्ययन सामग्री केवल निर्धारित दुकानों या स्कूल परिसर से खरीदने के लिए मजबूर करते हैं, जबकि वही या समान किताबें खुले बाजार में काफी सस्ती मिलती हैं।
मंत्री के इस बयान से निजी स्कूल संचालकों और प्रबंधन के बीच हलचल मच गई है। इस संबंध में स्कूल एवं जन शिक्षा विभाग इन अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर रहा है। जल्द ही राज्यभर के सभी निजी स्कूलों के लिए औपचारिक निर्देश और दिशानिर्देश जारी किए जाने की संभावना है।