छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने न्यायिक कार्यों के सुचारू संचालन के लिए नया रोस्टर जारी कर दिया है। यह रोस्टर तीन जुलाई 2026 से अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा। नए रोस्टर के तहत विभिन्न डिवीजन बेंच और सिंगल बेंच के बीच मामलों का नए सिरे से आवंटन किया गया है, वहीं रजिस्ट्री के अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारियों में भी बदलाव किया गया है। नए रोस्टर के अनुसार चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच जनहित याचिकाओं (PIL), रिट अपील, हैबियस कॉर्पस याचिकाएं, आपराधिक अपील, पूंजी दंड संदर्भ, आपराधिक अवमानना, एफआईआर निरस्तीकरण से जुड़ी याचिकाओं तथा विशेष रूप से आवंटित मामलों की सुनवाई करेगी।
जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस संजय कुमार जायसवाल की डिवीजन बेंच को वे सभी आपराधिक मामले सौंपे गए हैं, जो किसी अन्य डिवीजन बेंच के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते। रोस्टर के तहत जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की बेंच वर्ष 2016 से लंबित दोषमुक्ति (Acquittal) अपीलों की सुनवाई करेगी। इससे लंबे समय से लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण की उम्मीद जताई जा रही है।
जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच को सिविल मामलों, कंपनी अपील, वैवाहिक मामलों की प्रथम अपील, कर संबंधी प्रकरण, ट्रिब्यूनल के आदेशों के विरुद्ध दायर रिट याचिकाएं तथा कमर्शियल अपीलेट डिवीजन से जुड़े मामलों की सुनवाई की जिम्मेदारी दी गई है।
हाईकोर्ट प्रशासन ने न्यायिक कार्यों को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से रजिस्ट्री के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के कार्यों और जिम्मेदारियों का भी नए सिरे से निर्धारण किया है। नया रोस्टर अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा।