राज्य में माओवादी गतिविधियों में काफी कमी आई है और प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के केवल 40 सदस्य ही सक्रिय हैं। यह जानकारी सोमवार को ओडिशा विधानसभा में दी गई।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सदन को बताया कि करीब 40 माओवादी छोटे-छोटे समूहों में कलाहांडी जिला, रायगड़ा जिला, कंधमाल जिला, बौध जिला, बलांगीर जिला और बरगढ़ जिले के कुछ इलाकों में सक्रिय हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य में माओवादी उग्रवाद में उल्लेखनीय गिरावट आई है। भारत सरकार की सिक्योरिटी रिलेटेड एक्सपेंडिचर (SRE) योजना के तहत अब केवल कंधमाल जिला “अन्य वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिला” श्रेणी में है। जबकि मलकानगिरी, कोरापुट, नुआपड़ा, नवरंगपुर, कलाहांडी, रायगड़ा, बौध और बलांगीर जिलों को “लेगेसी एंड थ्रस्ट” श्रेणी में रखा गया है।
इस बीच राज्य सरकार ने माओवादियों के लिए समर्पण और पुनर्वास योजना में संशोधन करते हुए पात्रता मानदंड कड़े कर दिए हैं। नई अधिसूचित नीति के अनुसार लाभ केवल उन्हीं समर्पित माओवादियों को मिलेगा जो ओडिशा में सक्रिय रहे हों या राज्य के मूल निवासी हों।
यह कदम इस चिंता के बीच उठाया गया है कि पहले की योजना में पड़ोसी छत्तीसगढ़ की तुलना में अधिक वित्तीय पैकेज दिए जा रहे थे।
पिछले वर्ष नवंबर में आत्मसमर्पण करने वाले वामपंथी उग्रवादियों के लिए इनाम राशि बढ़ाने के बाद राज्य सरकार ने अब पात्रता शर्तों में संशोधन किया है। राज्य पुलिस ने केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ मिलकर माओवादी गतिविधियों को 31 मार्च तक जीरो करने का लक्ष्य रखा है, जो केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा निर्धारित समयसीमा है।