ओडिशा की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत पूर्व आईएएस अधिकारी सुजाता राउत कार्तिकेयन, जो पूर्व नौकरशाह से राजनेता बने वीके पांडियन की पत्नी हैं, आज औपचारिक रूप से बीजू जनता दल (बीजेडी) में शामिल हो गईं।
उनका औपचारिक स्वागत समारोह बीजेडी मुख्यालय शंख भवन में आयोजित किया गया, जिसमें बीजेडी सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की उपस्थिति रही। इस अवसर पर पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, पूर्व विधायक, सांसद और पूर्व मंत्री भी मौजूद थे।
नवीन पटनायक ने स्वयं सुजाता कार्तिकेयन के पार्टी में शामिल होने की घोषणा की और उनका स्वागत किया। सूत्रों के अनुसार, उन्हें पार्टी में शामिल करने का निर्णय सीधे नवीन पटनायक ने लिया, जिससे पिछले कई सप्ताहों से चल रही अटकलों पर विराम लग गया।
सुजाता कार्तिकेयन ने इसी वर्ष आईएएस सेवा से इस्तीफा दिया था। सक्रिय राजनीति में उनकी एंट्री को लेकर काफी चर्चा हो रही है, खासकर इसलिए क्योंकि उनके पति वीके पांडियन का नवीन पटनायक सरकार के अंतिम वर्षों में पार्टी में बड़ा प्रभाव रहा है।
इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक विश्लेषक चर्चा कर रहे हैं कि क्या सुजाता कार्तिकेयन 2024 विधानसभा चुनाव में हार के बाद संघर्ष कर रही बीजेडी को फिर से मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
पार्टी में शामिल होने के बाद सुजाता कार्तिकेयन ने कहा,
"मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानती हूं कि पिछले 24 वर्षों से मुझे नवीन पटनायक जी के नेतृत्व में काम करने और ओडिशा की जनता की सेवा करने का अवसर मिला। आज एक बार फिर मुझे उनके नेतृत्व में राज्य के लिए काम करने का अवसर मिला है। भगवान जगन्नाथ की कृपा और बीजू जनता दल के लाखों कार्यकर्ताओं के आशीर्वाद से मैं पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ ओडिशा की सेवा जारी रखूंगी।"
कौन हैं सुजाता कार्तिकेयन?
सुजाता कार्तिकेयन वर्ष 2000 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। सुजाता कार्तिकेयन 2000 बैच की आईएएस अधिकारी हैं, जिन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन पूरा किया।
उनका प्रशासनिक करियर ओडिशा के नक्सल प्रभावित सुंदरगढ़ जिले से शुरू हुआ, जहां उन्होंने कई प्रभावशाली सामाजिक कल्याण कार्यक्रम शुरू किए। वर्ष 2005 में उन्होंने हाईस्कूल की छात्राओं के लिए "मोबिलिटी इज़ एम्पावरमेंट" (गतिशीलता ही सशक्तिकरण है) के नारे के साथ साइकिल वितरण योजना शुरू की।
वर्ष 2006 में उन्होंने सुंदरगढ़ में मध्याह्न भोजन (MDM) योजना में अंडा शामिल करने की पहल की। दाल या तेल की मात्रा बढ़ाने के बजाय बच्चों के पोषण स्तर को बेहतर बनाने के लिए अंडा जोड़ा गया। बाद में इस पहल को पूरे राज्य में लागू किया गया।
सुंदरगढ़ में उन्हें "फुटबॉल कलेक्टर" के नाम से भी जाना जाता था। उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं के बीच खेलों को बढ़ावा देने के लिए फुटबॉल और हॉकी पर विशेष ध्यान दिया। इसके लिए खेल सामग्री वितरित की गई और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए छात्रावास भी स्थापित किए गए।
उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक ओडिशा की प्रमुख महिला सशक्तिकरण योजना मिशन शक्ति का सफल नेतृत्व रहा। उनके कार्यकाल में यह कार्यक्रम 70 लाख महिलाओं तक पहुंचा और स्वयं सहायता समूहों (SHG) के लिए ऋण सहायता सात वर्षों में 500 करोड़ रुपये से बढ़कर 15,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
कटक जिले की पहली महिला कलेक्टर के रूप में उन्होंने 'ममता' योजना की भी शुरुआत की, जो गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए शुरू की गई एक सशर्त नकद हस्तांतरण योजना है।