अदालत के आदेश के बावजूद पत्नियों को भरण-पोषण राशि नहीं देने वाले सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने ऐसे पुरुष सरकारी कर्मचारियों के वेतन से भरण-पोषण की राशि सीधे काटने का निर्देश दिया है।
जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार के कई पुरुष कर्मचारी अपनी पत्नियों या बच्चों को भरण-पोषण की राशि का भुगतान नहीं कर रहे हैं। इसमें तलाक के बाद देय गुजारा भत्ता भी शामिल है। विभिन्न अदालतों में सुनवाई और स्पष्ट आदेश जारी होने के बावजूद ये कर्मचारी भुगतान की अनदेखी कर रहे हैं। औसतन मुख्यमंत्री के शिकायत प्रकोष्ठ में प्रत्येक जनसुनवाई के दौरान ऐसे दो से तीन मामले सामने आते हैं।
मुख्यमंत्री ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित कर्मचारियों के वेतन से भरण-पोषण की राशि सीधे काटने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि अदालत की अवमानना करना और सरकारी कर्मचारियों द्वारा पत्नियों व बच्चों के साथ इस तरह का व्यवहार पूरी तरह अस्वीकार्य है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य सरकार ने इस संबंध में नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निर्देश के अनुसार, अदालत से गुजारा भत्ता भुगतान का आदेश प्राप्त होने के बाद संबंधित डीडीओ कर्मचारी का मासिक वेतन बिल तैयार करेंगे। अदालत द्वारा निर्धारित राशि वेतन से काटकर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सीधे पत्नी या बच्चे के बैंक खाते में जमा की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि अदालत के आदेश से संबंधित भरण-पोषण के मामलों को आने वाले दिनों में राज्य के एकीकृत और स्वचालित एचआरएमएस में शामिल किया जाए, ताकि प्रक्रिया को और सुचारु बनाया जा सके।
इस पहल से न केवल अदालत के आदेशों का पालन सुनिश्चित होगा, बल्कि प्रभावित महिलाओं और बच्चों को भी बड़ी राहत मिलेगी।