ओडिशा क्राइम ब्रांच की साइबर पुलिस ने एक बड़े ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी मामले में नई दिल्ली के 56 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि इस फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए शिकायतकर्ता से 2.06 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गई थी। आरोपी की पहचान विनय कुमार शर्मा के रूप में हुई है, जो पश्चिमी दिल्ली के जनकपुरी का निवासी है। उसे द्वारका इलाके से वित्तीय लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों के विस्तृत विश्लेषण के बाद गिरफ्तार किया गया। इस कार्रवाई का नेतृत्व इंस्पेक्टर तपन कुमार प्रधान ने किया।
सीआईडी क्राइमब्रांच ओडिशा की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, शिकायतकर्ता को 23 दिसंबर 2024 को बिना उसकी सहमति के एक व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा गया था। ठगों ने खुद को किसी प्रतिष्ठित कंपनी के वित्तीय विशेषज्ञ और फंड मैनेजर बताकर शेयर बाजार से जुड़े टिप्स और विश्लेषण साझा किए, जिससे पीड़ित का भरोसा जीता गया।
योजना को सही मानकर पीड़ित ने दिसंबर 2024 से मार्च 2025 के बीच 54 लेनदेन के जरिए अपने तीन बैंक खातों से कुल 2,06,07,500 रुपये पांच अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए।
जब पीड़ित ने अपने पैसे निकालने की कोशिश की, तो “रिस्क कंट्रोल टीम” बनकर बैठे लोगों ने विभिन्न झूठे बहानों से रकम देने से इनकार कर दिया। खुद के साथ ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी के पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, आधार और पैन कार्ड सहित कई आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है।
आरोपी को द्वारका की अदालत में पेश किया गया है और ट्रांजिट रिमांड पर भुवनेश्वर लाया जा रहा है। उस पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिनमें धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश शामिल हैं। साथ ही, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66-C (पहचान की चोरी) और 66-D (प्रतिरूपण के जरिए धोखाधड़ी) भी लगाई गई हैं।
ओडिशा क्राइम ब्रांच ने लोगों से सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पर मिलने वाले अनचाहे निवेश प्रस्तावों से सतर्क रहने की अपील की है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि निवेश करने से पहले हमेशा सत्यापन करें, ताकि साइबर ठगी से बचा जा सके। साथ ही ऐसे मामलों की सूचना 1930 साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस स्टेशन में देने की सलाह दी गई है।