ओडिशा सरकार ने मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली 11 सदस्यीय आर्थिक सलाहकार परिषद (CM-EAC) का गठन किया है। यह परिषद आर्थिक विकास, सार्वजनिक वित्त, निवेश, रोजगार और सतत विकास से जुड़े मुद्दों पर आंकड़ों के आधार पर नीतिगत सुझाव देगी। इस संबंध में वित्त विभाग ने आधिकारिक अधिसूचना जारी की है। राज्य सरकार ने ‘समृद्ध ओडिशा’ के तहत 2036 तक राज्य की अर्थव्यवस्था को 500 अरब अमेरिकी डॉलर और ‘विकसित ओडिशा’ के तहत 2047 तक 1.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने के उद्देश्य से परिषद का गठन किया है।
वित्त विभाग की अधिसूचना के अनुसार, CM-EAC एक स्वतंत्र सलाहकार निकाय के रूप में काम करेगी और आर्थिक एवं विकास संबंधी मामलों में मुख्यमंत्री को भविष्य को ध्यान में रखते हुए सुझाव देगी।
परिषद में सात विशेषज्ञ सदस्य होंगे। मुख्य सचिव और विकास आयुक्त-सह-अपर मुख्य सचिव पदेन प्रशासनिक सदस्य होंगे, जबकि वित्त विभाग के प्रधान सचिव परिषद के सदस्य-सचिव के रूप में कार्य करेंगे। विशेषज्ञ सदस्यों का कार्यकाल दो वर्ष या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, रहेगा।
परिषद वैश्विक, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर होने वाले व्यापक आर्थिक बदलावों तथा उनके ओडिशा पर संभावित प्रभावों का अध्ययन करेगी। यह नीति सुधारों के साथ-साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल अर्थव्यवस्था, हरित ऊर्जा परिवर्तन, ब्लू इकोनॉमी, जलवायु अनुकूलन और तकनीक आधारित शासन जैसे उभरते क्षेत्रों पर भी सरकार को सलाह देगी।
परिषद के कार्यक्षेत्र में सतत एवं समावेशी विकास, औद्योगिकीकरण, निवेश, रोजगार और राज्य की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने के उपाय सुझाना भी शामिल होगा।
अधिसूचना के अनुसार, CM-EAC गैर-कृषि अर्थव्यवस्था के विस्तार, MSME क्षेत्र के विकास, औद्योगिक क्लस्टर, कौशल विकास और मानव पूंजी को मजबूत करने के संबंध में भी सरकार को सुझाव देगी।
परिषद की बैठक कम से कम हर छह महीने में एक बार होगी। जरूरत पड़ने पर किसी विशेष मुद्दे पर विचार-विमर्श के लिए क्षेत्रीय विशेषज्ञों, सरकारी अधिकारियों, शिक्षाविदों, उद्योग प्रतिनिधियों और अन्य संगठनों को भी आमंत्रित किया जा सकेगा।
अधिसूचना में नामित विशेषज्ञ सदस्यों में पूर्व मुख्य सचिव डॉ. जुगल किशोर महापात्र, पूर्व पारादीप पोर्ट अथॉरिटी अध्यक्ष संतोष कुमार महापात्र और आईएमएफ के फिस्कल अफेयर्स विभाग (टैक्स) के पूर्व वरिष्ठ अर्थशास्त्री अरविंद मोदी शामिल हैं।