ओडिशा सरकार ने कहा है कि राज्य में माओवादियों की मौजूदगी अब बेहद सीमित रह गई है और वर्तमान में कंधमाल, कलाहांडी तथा रायगढ़ा जिलों के सीमावर्ती क्षेत्रों में केवल लगभग 15 उग्रवादी सक्रिय हैं।
सोमवार को राज्य विधानसभा में कांग्रेस विधायक ताराप्रसाद वाहिनीपति के प्रश्न का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बताया कि ये माओवादी दूरस्थ त्रि-सीमा (ट्राई-जंक्शन) क्षेत्रों तक ही सीमित हैं और राज्य के अन्य हिस्सों में उनकी कोई उल्लेखनीय मौजूदगी नहीं है।
केंद्र सरकार की सिक्योरिटी रिलेटेड एक्सपेंडिचर (एसआरई) योजना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में ओडिशा का केवल कंधमाल जिला ही आधिकारिक रूप से वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) प्रभावित श्रेणी में आता है। वहीं बौध, बलांगीर, कलाहांडी, कोरापुट, मलकानगिरि, नवरंगपुर, नुआपड़ा और रायगढ़ा जिलों को “लेगेसी एंड थ्रस्ट” (एल एंड टी) श्रेणी में रखा गया है।
मुख्यमंत्री, जिनके पास गृह विभाग का भी प्रभार है, ने कहा, “कंधमाल-कलाहांडी-रायगढ़ा सीमा क्षेत्र में लगभग 15 माओवादियों की मौजूदगी को छोड़कर राज्य के किसी अन्य हिस्से में माओवादी गतिविधि नहीं है।”
राज्य के उग्रवाद-विरोधी और पुनर्वास प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए माझी ने बताया कि वर्ष 2024 से 15 मार्च 2026 तक कुल 96 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है।
राज्य की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत पूर्व माओवादियों को आर्थिक सहायता, आवास सुविधा, मासिक भत्ता, 36 महीनों तक व्यावसायिक प्रशिक्षण, विवाह सहायता तथा स्वास्थ्य सेवाओं और राशन सुविधाओं की उपलब्धता दी जा रही है, ताकि उन्हें मुख्यधारा के समाज में पुनः शामिल किया जा सके।
सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक ओडिशा को पूरी तरह माओवादी-मुक्त बनाना है।