बाढ़ प्रभावित 22 जिलों को 110 करोड़ की सहायता

  • Aug 06, 2026
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भुवनेश्वर,06 अगस्तः

ओडिशा सरकार ने बाढ़ प्रभावित 22 जिलों के लिए 110 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता जारी की है। साथ ही, राज्य के आपदा प्रबंधन ढांचे को अत्याधुनिक तकनीक और अधिक सटीक मौसम पूर्वानुमान प्रणाली से मजबूत करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं।

लोक सेवा भवन में गुरुवार को राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने ओडिशा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ओएसडीएमए) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बाढ़ प्रबंधन और आपदा तैयारी की समीक्षा बैठक की। बैठक में मंत्री ने बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन तेजी से पूरा करने तथा राज्यभर में बहुउद्देशीय चक्रवात एवं बाढ़ आश्रय केंद्रों के निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाढ़ का पानी उतरने के 72 घंटे के भीतर क्षति का आकलन करने का निर्देश दिया गया है और प्रभावित जिलों से लगातार रिपोर्ट प्राप्त हो रही हैं।

सरकार द्वारा जारी सहायता राशि में बालासोर को 22.03 करोड़ रुपये, जाजपुर को 20.20 करोड़ रुपये, भद्रक को 20.12 करोड़ रुपये, जगतसिंहपुर को 8.18 करोड़ रुपये, क्योंझर को 6.11 करोड़ रुपये, संबलपुर को 5.56 करोड़ रुपये, केंद्रापड़ा को 5.04 करोड़ रुपये तथा मयूरभंज को 5.02 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

मंत्री ने बताया कि इस वर्ष जुलाई महीने में ओडिशा में पिछले वर्ष की तुलना में 65 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई, जबकि कुछ क्षेत्रों में सामान्य से 97 प्रतिशत तक अधिक बारिश दर्ज की गई। कई नदियों का जलस्तर घटा है, लेकिन कई स्थानों पर अब भी ऊंचा बना हुआ है। सभी जिला प्रशासन को शुक्रवार शाम 5 बजे तक विस्तृत क्षति रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने बताया कि शुक्रवार शाम एक और समीक्षा बैठक होगी, जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों, जिला कलेक्टरों, बीडीओ और तहसीलदारों के साथ बाढ़ नियंत्रण, क्षतिग्रस्त तटबंधों की मरम्मत, नदियों की ड्रेजिंग एवं गहरीकरण तथा दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन उपायों पर चर्चा की जाएगी।

तकनीक आधारित आपदा प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए राज्य के 573 किलोमीटर लंबे समुद्री तट पर 122 अर्ली वार्निंग टावर स्थापित किए गए हैं, जिन्हें 360 डिग्री निगरानी कैमरों से लैस किया जाएगा। इसके अलावा सभी 314 ब्लॉकों को केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से जोड़ने के लिए सैटेलाइट संचार और हाई-स्पीड कम्युनिकेशन सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं। उन्नत चेतावनी प्रणाली का अध्ययन करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों ने गोवा और केरल का भी दौरा किया है।

 मौसम पूर्वानुमान को और सटीक बनाने के लिए संबलपुर में डॉप्लर वेदर रडार चालू हो चुका है। बालासोर और भुवनेश्वर में प्रस्तावित रडार जल्द शुरू होंगे, जबकि गोपालपुर और पारादीप के मौजूदा रडारों का उन्नयन किया जा रहा है। पुरी में भी नया डॉप्लर वेदर रडार स्थापित किया जाएगा। सभी रडार पूरी तरह चालू होने के बाद राज्य में मौसम की भविष्यवाणी और अधिक सटीक हो जाएगी।

बैठक में जलाशयों के बेहतर प्रबंधन, जल संरक्षण, नदी जल आवंटन और ड्रेनेज व्यवस्था को मजबूत करने का भी निर्णय लिया गया। कंप्यूटरीकृत निगरानी प्रणाली और पड़ोसी राज्यों के साथ बेहतर समन्वय के माध्यम से नदी जल के नियमन को प्रभावी बनाया जाएगा।

 आकाशीय बिजली से होने वाली मौतों को रोकने के लिए सरकार ने कृषि क्षेत्रों में ताड़ के पेड़ लगाने हेतु वन विभाग को 35 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। वहीं, भारी बारिश के दौरान शहरी जलभराव की समस्या के समाधान के लिए भुवनेश्वर नगर निगम ने आईआईटी रुड़की के सहयोग से कार्य शुरू किया है।

 मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि राज्य सरकार आपदा प्रबंधन प्रणाली को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान त्वरित राहत, प्रभावी प्रतिक्रिया और जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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